कच्ची और देशी शराब में मिलावट तो आम बात होती है, लेकिन ब्रांडेड शराब में ऐसा हो तो ताज्जुब ही होगा लेकिन ऐसा हो रहा है। इसे सेल्समैनों की बाजीगरी ही कहा जाएगा कि वे ब्रांडेड शराब की बोतलों में पानी मिला भी देते हैं और किसी को पता भी नहीं चल पाता।
मिलावटखोरी से ब्रांडेड शराब भी अछूती नहीं रह गई है। दुकानों के सेल्समैन ब्रांडेड शराब के क्वार्टर और बोतलों की सील को खोलते हैं फिर इनसे शराब निकाली जाती है और उसमें पानी मिलाकर खाली अद्धे की बोतल में भर दिया जाता है। इस बोतल में क्वार्टर से निकली सील को लगा दिया जाता है, जो बिल्कुल कंपनी जैसी ही लगती है। खरीदार इन्हें आसानी से खरीद लेते हैं और इसका फायदा सेल्समैन की जेब में चला जाता है। बदनामी कंपनी को झेलनी पड़ती है। प्लास्टिक छक्कन वाली सभी बोतलें आसानी से खुल जाती हैं और इनकी सील वैसी ही बनी रहती है जैसी नई होती है। बगैर प्लाटिक ढक्कन वाली बोतलों की सील सूजे से खोल दी जाती है ऐसा करने से वह पूरी तरह सुरक्षित रहती है और उसे दोबारा प्रयोग में लाया जा सकता है। इलाके में तकरीबन हर दुकान पर ये खेल चल रहा है।
फंडा नंबर दो
सेल्समैनों ने उन होटल स्वामियों को ट्रेंड कर दिया है जिनके यहां ज्यादातर लोग बोतल, अद्धा, क्वार्टर लेकर जाते हैं और वहां कुछ खाने के साथ इसे पीते हैं। शराब पीने वालों से यह होटल वाले फौरन ही बोतलों को अपने हाथ में लेकर खोल देते हैं। जिसमें सील टूटती नहीं और फिर इन बोतलों को 10 से 20 रुपये में सेल्समैनों को बेच दिया जाता है।
अनसुनी हो रही शिकायतें
दुकानों पर अक्सर शराब में मिलावट को लेकर विवाद दिखाई पड़ जाते हैं लेकिन सेल्समैन उनके आरोपों को नकार देते हैं। इसके बाद वह भी कहीं आगे शिकायत करने नहीं जाते हैं।