मामूली कहासुनी पर सगे चचेरे भाई को गोली मार देने के मामले में अदालत ने नौ वर्ष बाद अपना फैसला सुनाया है। एडीजे बाबूराम ने जानलेवा हमले के आरोपी को दोषसिद्ध पाते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर साढ़े पांच हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रमेश गुप्ता ने बताया कि मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव मुबारकपुर निवासी ओमकार रैदास की दादी की बीमारी के इलाज के लिए कुछ जमीन बेची गई थी। जमीन बिक्री की रकम में से इलाज के बाद बचे हुए रुपयों का हिसाब किताब करने के विवाद में उसके चचेरे भाई गुड्डू से कहासुनी हुई थी। आरोप है कि इसी विवाद के चलते 25 अगस्त 2006 को गुड्डू गौतम और उसकी मां रामजती ने ओमकार पर हमला बोल दिया और ओमकार को जान से मार डालने के लिए तमंचे से पेट में गोली मार दी। अदालत में सुनवाई के दौरान ओमकार, डॉ. रमारमण मिश्र और विवेचक आदित्य मिश्र की गवाही तत्कालीन एडीजीसी वीरेश सिंह तोमर ने दर्ज कराई थी। बचाव पक्ष की ओर से क्रॉस केस की दलील देते हुए खुद को निर्दोष बताया गया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए गुड्डू को दोषी पाते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर साढ़े पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं सह आरोपी के रूप में नामजद गुड्डू की माता रामजती को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है। कोर्ट ने फैसले में यह स्पष्ट किया है कि वसूले गए जुर्माने में से तीन हजार रुपये का मुआवजा पीड़ित को दिलाया जाएगा।