फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पत्नी से नाराज होकर गया युवक दो साल बाद लौटा

Thu, 12 May 2016 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बांकेगंज।
विज्ञापन
अादमी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
घर में छाई खुशियां, मानसिक मंदित है युवक
विज्ञापन

बताया, वह घर पर भेजता रहा चिट्ठी
दो साल पहले निकटवर्ती गांव बरगदिया से लापता हुआ युवक घर वालों को मिल ही गया। युवक ने बताया कि उसने कई चिट्ठियां भिजवाईं। परिवार वालों को कहना है कि मानसिक मंदित होने के कारण पता सही नहीं लिखवा पाता होगा, जिससे चिट्ठियां नहीं मिलीं। अब चिट्ठी मिली तो परिवारवाले चौकी बांकेगंज पुलिस के सहयोग से उसे इटावा जिले के जसवंतनगर ले आए। दो साल बाद युवक के लौटने से परिवार में हर्ष है।
निकटवर्ती गांव बरगदिया निवासी चोरईलाल का 45 वर्षीय  विवाहित पुत्र वीरेन्द्र कुमार दो साल पहले घर से नाराज होकर चला गया था। परिवारीजनों के काफी तलाशने के बाद भी वीरेन्द्र नहीं मिला। इस दौरान वीरेन्द्र के पिता चोरई मजदूरी कर पुत्र वधू और तीन बच्चों का किसी तरह पेट पालता रहा। पति के लापता होने के गम में पत्नी बीमार रहने लगी। वीरेन्द्र के घर लौटने की उम्मीद छोड़ चुके परिवारजनों को चार दिन पहले वीरेन्द्र का एक पत्र मिला, जिसमें उसने खुद को इटावा जिले के जसवंतनगर थाने के मजरा नगला विधि में होने की बात लिखी। दो साल बाद पुत्र की जानकारी मिलते ही पिता चोरई लाल, पत्नी और बच्चों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। हाथों में खुशियों भरा पत्र लेकर चोरई लाल बांकेगंज पुलिस चौकी  पहुंचे। पत्र को दिखाकर उसे इटावा से लाने के लिए सहयोग मांगा। पुलिस चौकी इंचार्ज ने जसवंत नगर कोतवाल से संपर्क साधकर इस बावत जानकारी ली। इसके बाद पिता चोरई के साथ पुलिस टीम मंगलवार को इटावा रवाना हुई। गुरुवार सवेरे पुलिस टीम वीरेन्द्र को लेकर बांकेगंज पहुंची। वीरेन्द्र के घर पहुंचते ही पत्नी और बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


घर लौटने तो बेताब था वीरेंद्र
दो साल पहले लापता हुए वीरेन्द्र ने बताया कि घर से भागने के बाद कुछ दिन तक इधर-उधर मजदूरी करके पेट पालता रहा। इसके बाद कुछ पैसे होने पर वह बस में बैठकर जिला इटावा के जसवंत नगर थाना के गांव नगला विधि पहुंच गया। जहां वह एक यादव परिवार में मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालता रहा। वीरेन्द्र ने बताया इस दौरान उसे पत्नी और बच्चों की याद आती रही। उसने कई चिट्ठियां भी भेजीं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसिक मंदित होने के कारण पता सही नहीं लिखवा पा रहा होगा। अब सही पते वाली चिट्ठी घर आ गई। वीरेन्द्र का कहना है कि कुछ दिन यहां रुककर इस बार अकेला नहीं हंसी-खुशी परिवार के साथ इटावा फिर चला जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें