1987 से चल रहा था फरार, 10 मार्च को जारी हुआ था स्थाई वारंट
बाघ को जहर देकर हत्या करने का आरोपी 20 साल पुलिस की पकड़ में आ सका है। पलिया पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सीजेएम डॉ. दीनानाथ की कोर्ट में पेश किया। सीजेएम ने आरोपी को जेल भेज दिया है। वह सन 1987 से फरार चल रहा था।
वन विभाग के अधिवक्ता संजय राय ने बताया कि नौ जनवरी 1987 को थाना पलिया के बघैया निवासी चंद्रिका यादव के जानवर का शिकार बाघ ने किया था। चंद्रिका यादव ने अपने पालतू जानवर के अधखाए शव पर जहर डाल दिया। बाघ ने जब दोबारा जानवर के अवशेष को खाया तो जहर के प्रभाव से उसकी मौत हो गई। वन विभाग ने चंद्रिका यादव के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया लेकिन वह पकड़ा नहीं जा सका। वह अदालत में भी हाजिर नहीं हुआ। इस पर 1995 में कोर्ट ने चंद्रिका के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इसके बावजूद न तो वह पकड़ा गया न ही कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। आखिर 10 मार्च 2016 को उसके खिलाफ स्थाई वारंट जारी कर दिया गया।
पलिया पुलिस ने 20 साल से फरार चल रहे इस आरोपी को 19 अप्रैल को गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया है। आरोपी के फरार हो जाने के चलते 20 साल बाद भी इस मामले में फैसला नहीं हो सका है।