लखमीपुर खीरी/महंगापुर।
आत्महत्या करने से करीब तीन घंटे पहले पत्नी और बेटी से हंसी-खुशी से बात की। रोज की तरह माता-पिता का हाल पूछा। घर पर भी कोई ऐसी बात नहीं थी, जिससे एसएसबी जवान ब्रह्म नारायण शर्मा(35) आहत हों। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार ऐसी क्या बात उनके जेहन में अचानक आ गई, जिसने जांबाज जवान को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया, जबकि मृतक जवान ही अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था। इस मामले में एसएसबी अफसर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
मध्य प्रदेश के जिला व थाना भिंड के गांव चंदपुरा निवासी ब्रह्म नारायण शर्मा एसएसबी की 39 वीं वाहिनी में हवलदार था। वर्तमान समय में वह गौरीफंटा चेक पोस्ट पर तैनात था। बृहस्पतिवार शाम करीब साढ़े छह बजे अपनी ही सरकारी इंसास रायफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इससे एसएसबी में खलबल मच गई थी।
सूचना पाकर मृतक जवान के बहनोई रामनरेश गोहरे परिवार के अन्य लोगों के साथ शुक्रवार की दोपहर करीब 11 बजे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। बहनोई रामनरेश गोहरे के मुताबिक जवान ब्रह्म नारायण शर्मा अपने पिता कैलाश नारायण शर्मा के इकलौते पुत्र थे। पिता खेती बाड़ी का काम करते हैं। पत्नी राधा देवी और छह वर्षीय पुत्री सौम्या है। उन्होंने बताया कि ब्रह्म नारायण 15 दिन की छुट्टी बिताकर करवा चौथ के दूसरे दिन वापस आया था। घर परिवार में भी उसकी किसी प्रकार की कोई बात नहीं थी। वह प्रतिदिन अपने माता-पिता, पत्नी और पुत्री से बातचीत करता था। परिवार के लोग भी यह बात नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर उसने क्यों आत्महत्या की। उधर पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग एसएसबी के वाहन से शव लेकर मध्य प्रदेश के लिए रवाना हो गए हैं।
पत्नी से 43 और माता-पिता से 48 सेकेंड हुई थी बात
मध्य प्रदेश से अपने साले का शव लेने आए रामनरेश गोहरे ने बताया कि रोज की तरह ही बृहस्पतिवार की दोपहर करीब दो बजे ब्रह्म नारायण ने पहले अपनी पत्नी राधा देवी से 43 सेकेंड बात की। बताया कि उसकी दो बजे से ड्यूटी है। ड्यूटी से शाम करीब आठ बजे वापस लौटने पर बात होगी। उसने अपनी दुलारी बिटिया सौम्या से भी कुछ देर बात की। उन्होंने बताया कि तीन बजे के करीब फिर कॉल कर ब्रह्म नरायाण ने अपनी मां रमा देवी और पिता से बात की। घर का हालत पूछा था और आठ बजे बात करने की बात कही थी।
दो साल पहले ही बना था हवलदार
जवाऌन ब्रह्मपाल नारायण शर्मा वर्ष 2006 में एसएसबी में भर्ती हुआ था। दो साल पहले ही उसे प्रोन्नति मिली थी और वह हवलदार बना था। जवान की मौत के बाद से साथी जवानों में शोक की लहर दौड़ गई है।