लखीमपुर खीरी। किसानों के समर्थन में हुए धरना-प्रदर्शन के बाद सरकार विरोधी नारेबाजी करने वाले 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मगर इस रिपोर्ट में किसी दल या राजनीतिक पार्टी और उनके नेताओं का जिक्र तक नहीं किया गया है जबकि 41 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में कई राजनीतिक दल सरकार का विरोध कर रहे हैं। किसानों ने मंगलवार को भारत बंद का आह्वान किया था, जिसके समर्थन में भाकपा माले ने जुलूस निकालकर विलोबी मैदान में धरना प्रदर्शन कर नारेबाजी की थी। वहीं, विलोबी मैदान में धरना दे रहे कांग्रेसियों ने पुलिस को गच्चा देकर कचहरी तिराहे पर जाम लगाकर सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की थी। इस मामले में पुलिस ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल सहित 41 नेताओं को गिरफ्तार कर निजी मुचलके पर रिहा कर दिया था। सपा ने निवर्तमान जिलाध्यक्ष मोहम्मद कय्यूम के नेतृत्व में आंबेडकर पार्क में शांतिपूर्वक धरना देकर एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा था। इन प्रदर्शनों को लेकर बुधवार को जेल गेट चौकी इंचार्ज जेपी यादव की ओर से 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ सदर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई, जिसमें सरकार विरोधी नारेबाजी करने, धारा 144 और कोविड-19 नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। जिस पर दस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ 6 यूपी प्रोविंशियल स्पेशल पावर एक्ट सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। मगर इस रिपोर्ट में किसी राजनीतिक दल या नेता का जिक्र न होने से कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
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कुछ लोगों ने सरकार के विरोध में नारेबाजी की थी, जिनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। वे किसी पार्टी या राजनीतिक दल के सदस्य थे, यह विवेचना में साफ हो सकेगा।
- सुनील कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक सदर
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जेल से रिहा हुए आधा दर्जन सपाई
गोला गोकर्णनाथ। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान गिरफ्तार आधा दर्जन सपा नेताओं को गुरुवार को जमानत पर रिहा कर दिया गया। रिहा किए गए सपाइयों ने प्रदेश सरकार पर राजनीतिक द्वेष के आधार पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
सात दिसंबर की रात पुलिस प्रशासन ने किसान आंदोलन को विफल करने के लिए सपा के नगर अध्यक्ष वारिस अली अंसारी, आकाश लाला, पंकज लाला, रजत गुप्ता, प्रभात गुप्ता और आरिफ अंसारी को घर से गोला कोतवाली ले जाकर पूरे दिन नजरबंद रखने के बाद शाम को शांतिभंग की आशंका में जेल भेज दिया था, जिन्हें गुरुवार को जमानत पर रिहा कर दिया गया। जेल से छूटे सपा नेताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार के दबाव में पुलिस प्रशासन ने द्वेष भावना रखते हुए गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेजा था। वारिस अली अंसारी ने कहा कि पार्टी किसानों के हित में खड़ी है और सरकार ने बिना किसानों की राय लिए जो भी कानून बनाए हैं, वे किसानों के हित में नहीं हैं। सपा कार्यकर्ता दबने वाले नहीं हैं, वे किसानों, मजलूमों की आवाज उठाने के लिए हर कुर्बानी को तैयार हैं। संवाद