बेलरायां। दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरयां वनरेंज के तहत पार्क में एक वन दरोगा के संरक्षण में काफी समय से अवैध कटान का धंधा चल रहा है। बुधवार की रात लकड़कट्टों से मुठभेड़ के बाद अब एक वन दरोगा अपनी करतूतों को छिपाने की पूरी जुगत में जुट गया। बृहस्पतिवार को घटना स्थल का मुआयना करने पहुंचे पार्क उपनिदेशक को भी वन दरोगा ने यह कहकर गुमराह किया कि माफिया गाजियाबाद में है। लकड़कट्टे खुद अपने घरों या खेतों में लकड़ी चिरान कर बिक्री करते हैं, जबकि माफिया क्षेत्र में खुलेआम घूमते दिखते हैं।
दुधवा नेशनल पार्क की बेलरायां रेंज के तहत इन दिनों बड़े पैमाने पर लकड़ी का कटान होता है। वन विभाग व इस धंधे से जुड़े लोगों की माने तो यह कारोबार बेलरायां रेंज में तैनात एक वन दरोगा के संरक्षण में फलफूल रहा है। बुधवार को पार्क के आम बाग में लकड़कट्टों व वन विभाग की टीम का आमना-सामना हो गया था। दोनों तरफ से हुई फायरिंग में लकड़कट्टे चार साइकिलों को छोड़कर भाग निकले थे। वन विभाग ने साइकिलों व उन पर लदे साल की लकड़ी के चार बोटे कब्जे में लिया था। मुठभेड़ की सूचना पर दुधवा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनोज सोनकर बृहस्पतिवार को घटना स्थल पहुंचे। उन्होंने मौका मुआयना किया। रेंज अफसरों से जानकारी ली। सूत्रों के मुताबिक जब डिप्टी डायरेक्टर ने क्षेत्र में माफिया की जानकारी ली तो वन दरोगा ने उन्हें यह कहते हुए गुमराह कर दिया कि एक वन माफिया काफी समय से गाजियाबाद चला गया। वह वहीं काम कर रहा है, जबकि यह माफिया क्षेत्र में ही है। इतना ही नहीं लकड़कट्टों द्वारा पार्क से लकड़ी काटकर लाने व खेतों आदि में चिरान होने की बात बताकर गुमराह करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। वन क्षेत्राधिकारी (पार्क) बेलरायां चंद्रभाल ने बताया कि डिप्टी डायरेक्टर ने मौका मुआयना किया है। वन टीम पर गोली चलाने व लकड़ी काटकर लाने वालों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
तीन महीने पहले फूंक दी थी लकड़ी
करीब तीन महीने पहले कथित वन दरोगा ने दुधवा टाइगर रिजर्व से सटे महाराजनगर गांव में एक घर में कई दिनों से लकड़ी चिरवा रहा था। लकड़ी चिरवाने की भनक जब आसपास के लोगों को हुई तो दरोगा ने पकड़े जाने के डर से सारी लकड़ी जंगल के अंदर ले जाकर फूंक दी थी। यह मामला कई दिनों तक ग्रामीणों व वन विभाग के अफसरों में चर्चा का विषय बना रहा था।
माफिया करते हैं लकड़ी की सप्लाई
जंगल से काटकर लाई जा रही बेसकीमती साल और सागौन की लकड़ी लकड़कट्टे क्षेत्र में सक्रिय वन माफिया को बिक्री कर देते हैं। माफिया इस लकड़ी का अपने घरों पर चिरान कराकर फर्नीचर बनाते हैं। बाद में उसे सप्लाई कर देते हैं। किसी को शक न हो, इसके लिए कभी-कभार वन विभाग की लकड़ी की लॉट खरीद लेते है। उसी लॉट की आड़ में यह गोरखधंधा चलता रहता है।