गोला गोकर्णनाथ। तहसील परिसर में लेखपाल संघ के धरना प्रदर्शन के दौरान की गई टिप्पणी पर वकील भड़क गए। वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान लेखपाल और वकील आमने- सामने आ गए। देखते ही देखते टकराव की स्थिति बन गई। जानकारी होने पर एसडीएम ने किसी तरह दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया।
बुधवार को एसडीएम कोर्ट के पास बरामदे में उप्र लेखपाल संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर लेखपाल जिला कन्नौज की तहसील छिबरामउ में वकीलों और महिला लेखपालों के बीच हुई मारपीट के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे थे। तभी किसी वक्ता की टिप्पणी पर तहसील के वकील भड़क उठे, अधिवक्ता लालबिहारी वर्मा के नेतृत्व में वकीलों ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते मामला बिगड़ने लगा। स्थिति से निपटने के लिए कोतवाली से इंस्पेक्टर राजेश कुमार यादव, एसआई लल्ला गोस्वामी, शरद यादव दल बल के साथ तहसील पहुंच गए। किसी तरह एसडीएम अखिलेश यादव ने दोनों पक्षों को समझा मामला शांत कराया। वकीलों ने बार संघ के साथ बैठक कर निंदा प्रस्ताव एसडीएम सहित उच्चधिकारियों को भेजा। वहीं लेखपालों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर छिबरामउ तहसील में हुई घटना पर कार्रवाई की मांग की।
शांतिपूर्ण कर रहे थे धरना नहीं की कोई टिप्पणी
लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष आदित्य कुमार मिश्र ने बताया कि लेखपाल शांतिपूर्ण ढंग से धरना प्रदर्शन कर रहे थे। वकीलों पर किसी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं की। शासन से कार्रवाई की मांग की जा रही थी। उन्हें संगठन को राजस्व महासंघ, रजिस्ट्रार कानूनगो संघ का भी समर्थन मिला है।
धरना पर अनिल त्रिपाठी, अविनाश मिश्र, शिवाकांत अवस्थी, शैलेंद्र वर्मा, अजय गुप्ता, पूनम यादव, रूबी वर्मा, निधि कश्यप, शिखा गोस्वामी, रजनीश, गौरव गुप्ता आदि मौजूद थे।
अशोभनीय टिप्पणी से भड़के वकील, की निंदा
सेंट्रल बार एसोसिएशन के सभागार में अध्यक्ष केके शुक्ला की अध्यक्षता में बैठक कर अधिवक्ताओं ने कहा कि लेखपालों द्वारा वकीलों पर अशोभनीय टिप्पणी की गई है। तहसीलदार ने हाथ में काली पट्टी बांधकर लेखपालों का मनोबल बढ़ाने का काम किया है। वकीलों ने निंदा प्रस्ताव पास कर कहा कि कोर्ट के पास दरा बिछाकर, माइक लगाकर बिना अनुमति धरना प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए, जिससे न्यायालय और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न न हो। कर्मचारियों की यूनियन पर प्रतिबंध लगाए जाएं, ताकि सरकार पर अनुचित दबाव न बनने पाए। साथ ही लेखपालों की संपत्तियों की जांच कराई जाए। जितेंद्र वर्मा, सुनीता मिश्रा, नरेश सिंह तोमर, लालबहादुर यादव, राजेश गिरि, संदीप अवस्थी, राकेश त्रिपाठी आदि वकीलों ने निंदा प्रस्ताव एसडीएम को सौंपा।