लखीमपुर खीरी। साहब मुझ क्यों थाने ले चल रहे हो। मुझ पर कोई केस नहीं है। यह कहते हुए सलीम रोता और गिड़गिड़ाता रहा। घर वाले भी कहते रहे कि मेरे बेटे का वारंट नहीं होगा, लेकिन दरोगा ने उनकी एक नहीं सुनी। उसे लाकर हवालात में ठूंस दिया। अगले दिन सुबह पुलिस ने उसे चालान कर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम के कोर्ट में पेश किया तो पुलिस का कारनामा सामने आया। जिस सलीम का वांरट था, उसके स्थान पर पुलिस दूसरे सलीम को उठा लाई थी। कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने आनन-फानन में उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए और उसे छोड़ दिया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने कसबा सिंगाही के वार्ड संख्या एक के रहने वाले सलीम पुत्र जमालू के दहेज प्रताड़ना के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। शुक्रवार की रात हल्का दरोगा सुरेश कुमार सिंह ने जमालू के घर की जगह वार्ड संख्या सात निवासी जमालुद्दीन के घर पर दबिश दी। पुलिस जब उसके बेटे सलीम को पकड़कर चली तो सलीम रोने-गिड़गिड़ाने लगा। उसने कई बार कहा कि साहब उस पर कोई केस नहीं है। उसने कभी कोई गलत काम नहीं किया है। उसके घर वाले भी दरोगा की मिन्नतें करते रहे, लेकिन रुतबे में चूर दरोगा जी ने किसी की भी नहीं सुनी। उसे लाकर हवालात में बंद कर दिया। उसका आधार कार्ड भी नहीं देखा। इतना ही नहीं पुलिस ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। उसके नाम-पते की पुष्टि करना भी उचित नहीं समझा।
शनिवार को उसका चालान कर कोर्ट में पेश किया। जहां अभिलेखों में सलीम पुत्र जमालुद्दीन का कोई वारंटी नहीं था। इससे पुलिस में खलबली मच गई। अन्य अभियुक्तों के साथ उसे कोर्ट में पेश करने पहुंचे सिपाहियों ने आनन-फानन में पूरा मामला एसओ अजय कुमार और हल्का दरोगा को बताया। बाद में सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर उसे छोड़ दिया। एसओ अजय कुमार राय ने बताया कि चूक कहां पर हुई है। इसकी जांच की जा रही है।