लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग के मामले में जेल भेजे गए चार आरोपियों के पुलिस कस्टडी रिमांड पर सोमवार को सुनवाई के बाद सीजेएम ने सात दिन के लिए मंजूरी दे दी। हालांकि जांच कर रहे एटीएस के डीएसपी ने 10 दिन का रिमांड मांगा था। कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद एटीएस टीम जिला कारागार से चारों आरोपियों को अपने साथ ले गई। अब पुलिस चारों से पूछताछ कर टेरर फंडिंग कर आतंकियों को रकम पहुंचाने वाले मददगारों को बेनकाब करेगी।
यूपी एटीएस ने 11 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी पुलिस की मदद से नेपाल से आतंकियों को आर्थिक मदद देने वाले गिरोह के चार लोग गिरफ्तार किए थे। इनमें परतापुर चौधरी थाना इज्जतनगर (बरेली) के उम्मेद अली व सलीम सलमानी और तिकुनियां (लखीमपुर खीरी) के संजय अग्रवाल व एराज अली शामिल हैं। शुक्रवार को पुलिस ने सभी को सीजेएम की अदालत में पेश कर सात दिन का कस्टडी रिमांड मांगा था। कोर्ट ने चारों आरोपियों को जेल भेजते हुए रिमांड की अर्जी पर 14 अक्तूबर को सुनवाई की तिथि तय की थी। इसी दिन आरोपियों से कस्टडी रिमांड अर्जी पर आपत्ति मांगी थी।
सोमवार को सुबह 11.20 बजे अदालत में चारों आरोपियों को पेश किया गया। केवल संजय अग्रवाल की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। इसमें कहा गया कि उन्हें फर्जी तरीके से परेशान करने के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड मांग रही है। आरोप लगाते हुए अधिवक्ता ने कहा कि गिरफ्तारी दिखाने से तीन दिन पहले ही पुलिस घर से उठा ले गई थी। उन तीन दिन में जो भी पूछताछ होनी थी, हो चुकी है। साथ ही आशंका जताई कि कस्टडी में लेकर पुलिस उत्पीड़न करेगी। फर्जी बरामदगी भी दिखा सकती है। लिहाजा एक वकील को पूछताछ के दौरान साथ में रहने दिया जाए। एटीएस की ओर से डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि वांछित मुमताज के नेपाली लिंक और फहीम तथा सदाकत के नेटवर्क का खुलासा करने के लिए आरोपियों की 10 दिन की कस्टडी जरूरी है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सात दिन के लिए कस्टडी रिमांड अर्जी मंजूर कर ली।
कस्टडी रिमांड की अवधि सोमवार की शाम पांच बजे से शुरू हो गई, जो 21 अक्तूबर की शाम पांच बजे तक रहेगी। अदालत से चारों आरोपी जब जिला जेल पहुंचे तो अदालती आदेश के साथ एटीएस के डीएसपी भी जिला जेल पहुंच गए। जेल अधीक्षक आरबी पटेल ने बताया कि मेडिकल प्रक्रिया पूरी कराने और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद चारों आरोपियों को अदालत के आदेश पर एटीएस की कस्टडी में सौंप दिया गया है। एटीएस चारों आरोपियों को कस्टडी में लेकर चली गई।
तमाम पाबंदियों के साथ मिला रिमांड
रिमांड देते वक्त सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने पूछताछ करने वाली एजेंसियों पर पर कई पाबंदियां भी लगाई हैं। जिसमें सबसे अहम है कि एटीएस थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नही कर सकती है। साथ ही रिकवरी जैसे गतिविधि की वीडियो रिकार्डिंग भी कराने का निर्देश दिया है।
पहले मांगे थे सात दिन, फिर मांगी 10 दिन की कस्टडी
टेरर फंडिंग मामले की पूर्व में विवेचना कर रहे राकेश कुमार नायक सीओ निघासन की ओर से पेश की गई कस्टडी रिमांड अर्जी में मुमताज के नेपाली नेटवर्क, फहीम व सदाकत के लिंक पता करने व सबंधित खातों की पड़ताल सबंधी पूछताछ के लिए सात दिवस का कस्टडी रिमांड देने के लिए अदालत से प्रार्थना की गई थी। वहीं एटीएस को विवेचना अंतरित होने के बाद डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने नई कस्टडी रिमांड अर्जी पेश की और आरोपियों की दस दिन के लिए कस्टडी रिमांड मांगी थी, हलांकि सीजेएम कोर्ट ने पूछा कि इस कस्टडी रिमांड अर्जी में क्या कुछ दूसरी बातें लिखी गई है, इस पर एटीएस की ओर से कोई जवाब नही दिया जा सका। एटीेएस डीएसपी बोले पहले वाली अर्जी की बातें ही लिखी गई है।
पाबंदियों के बाद भी खूब चमके असलहे
कोर्ट परिसर में मुल्जिम पेश करने आए दरोगा की गोली से वकील की हत्या के बाद से हाईकोर्ट ने सख्त आदेश पारित करते हुए अदालती परिसर में किसी तरह के अस्त्र शस्त्र के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी, लेकिन सोमवार को पिस्टल और कार्बाइन के साथ कुछ पुलिस कर्मी बेखौफ होकर अदालती कक्षों के भीतर भी आते-जाते दिखाई दिए।
पत्नी व भाई ने कहा संजय निर्दोष
एटीएस की ओर से पेश कस्टडी रिमांड अर्जी के खिलाफ अपना पक्ष रखने के लिए अदालत ने आरोपियों को सोमवार को जेल से तलब किया था, खबर पर आरोपी संजय अग्रवाल की पत्नी और भाई भी सीजेएम कोर्ट के बाहर मुलाकात को एकत्रित हो गए। वहीं परिसर में कवरेज को आए इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया के लोगों के सामने रोते बिलखते हुए संजय की पत्नी नेहा अग्रवाल ने कहा कि उसके पति निर्दोष है। उन्हें फर्जी फंसाया जा रहा है।