लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग की रकम 90 करोड़ रुपये से अधिक होने की बात सामने आने और इतना बड़ा नेटवर्क देखने के बाद तय हुआ है कि नेशनल इंवस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) भी जांच करेगी। एनआईए के साथ ही इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) अफसरों ने यूपी एटीएस और जिला पुलिस से संपर्क कर मामले की जानकारी ली है। माना जा रहा है कि एनआईए की टीम जल्द ही यहां आएगी। टेरर फंडिंग गिरोह ने नेपाल की एक बैंक की वेबसाइट हैक कर 49 लाख रुपये निकाले थे। लखीमपुर खीरी पुलिस ने तीन दिन पहले निघासन के पलिया बस अड्डे से गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इनके पास से 4.75 लाख रुपये की भारतीय और 1.65 लाख रुपये की नेपाली करेंसी बरामद की थी। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों से जब पूछताछ की थी तो पता चला की रैकेट से जुड़े लोग विदेश से नेपाल की बैंकों में आने वाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलकर लखीमपुर खीरी के रास्ते देश भर में भेजते थे। आरोपियों के फोन की कॉल रिकार्डिंग से पता चला कि पाकिस्तानी हैंडलर अब तक 90 करोड़ रुपये आतंकियों तक पहुंचवा चुके हैं। यह जानने के बाद दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अधिकारी भी सकते में हैं। पुलिस के उच्चाधिकारी ने बताया कि जांच में गिरफ्तार आरोपियों का कनेक्शन बड़े स्तर पर होने की बात सामने आने के बाद एनआईए और आईबी के अफसरों ने यूपी एटीएस से संपर्क किया है। आईबी भी चारों आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। आरोपियों से पूछताछ से बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है। इन दोनों एजेंसियों के अधिकारियों ने सोमवार को एटीएस से अभियुक्तों के पुलिस रिमांड के बारे में जानकारी ली। देर शाम उन्हें सात दिन का रिमांड मिलने की जानकारी दे दी गई।
वॉयस मेसेज और व्हाट्सएप कॉल से करते थे बात
लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग मामले में एक और नया खुलासा हुआ है। गिरोह के सदस्य आमने-सामने काफी कम मिलते थे। फोन कॉल के बजाए एक-दूसरे से व्हाट्सएप कॉल और वॉयस मेसेज के जरिए ही एक-दूसरे से बात करते थे, ताकि सुरक्षा एजेंसियां उनकी बात न सुन सकें। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के मोबाइल से तमाम वॉयस रिकार्डिंग और व्हाट्सएप पर मेसेज मिले हैं। इन मेसेजों से कई अहम जानकारियां भी पुलिस के हाथ लगी हैं। जानकार बताते हैं कि आरोपियों को इस बात की जानकारी थी कि पुलिस उनकी कॉल को रिकार्ड कर सकती है। इसलिए व्हाट्सएप से मेसेज भेजकर और वॉयस कॉल करते थे।