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गोशालाओं में गायों की मौत को शासन ने लिया संज्ञान, भागे अफसर

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धौरहरा। ब्लॉक क्षेत्र के बबुरी नरूपुर और ईसानगर के महरिया की गोशाला में क्रमश: सात और तीन गोवंशीय पशुओं की मौत की खबर से लखनऊ तक में हड़कंप मच गया है। गोवंशीय पशुओं की मौत को शासन ने भी संज्ञान लिया है। नतीजतन गुरुवार को मंडल आयुक्त अनिल गर्ग के निर्देश पर अल्प बचत के लखनऊ मंडल के उपायुक्त डॉ. विनय कुमार ने इन दोनों गोशालाओं के अलावा कई गोशालाओं का निरीक्षण किया और व्यवस्थाएं देखीं। वहीं एडीएम अरुण कुमार सिंह ने भी गोशालाओं का निरीक्षण कर जानकारी की।
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धौरहरा ब्लाक की ग्राम पंचायत बबुरी नरूपुर में अमर उजाला टीम ने सोमवार को नरूपुर गौशाला की पड़ताल की तो पांच गाएं मृत मिलीं थीं। पता चला था कि 24 घंटे के अंतराल में पांच गायों की मौत हो गई है, वहीं मंगलवार को दो गोवंशीय पशुओं की और मौत हो गई थी। इस तरह 36 घंटे के अंतराल में ही यहां सात गायों की मौतों के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वहीं बुधवार को 12 घंटे के अंतराल में ईसानगर के गांव महरिया में भी तीन गोवंशीय पशुओं की मौत से अफरातफरी मच गई थी। मामले को शासन ने भी संज्ञान ले लिया है। इसके बाद मंडल आयुक्त के निर्देश पर पहुंचे उपायुक्त डॉ. विनय कुमार ने बबुरी नरूपुर की गोशाला में बीडीओ भीमजी उपाध्याय से पूरे मामले की जानकारी ली। साथ ही गोशाला के कर्मचारियों के भी बयान लिए। उन्होंने पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश गुप्ता, ईसानगर के डॉ. प्रदीप कुमार के भी बयान लिए। उन्होंने ग्राम विकास अधिकारी रजनी राना और प्रधान अजय कुमार वर्मा से भी जानकारी ली। इस दौरान उपायुक्त ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने जांच कर ली है, लेकिन यहां कोई जानकारी नहीं दे सकते। वह पूरे मामले की जानकारी मंडलायुक्त को सौंपेंगे। उधर, एडीएम अरुण कुमार सिंह ने कस्बे के अस्थाई गोआश्रय स्थल का निरीक्षण किया। गोआश्रय स्थल में जल निकासी का प्रबंध कराने के लिए नगर पंचायत के ईओ को निर्देश दिए।

गाय पालने पर नौ सौ रुपये देने का शासनादेश तक नहीं आया
धौरहरा में एडीएम अरुण कुमार सिंह ने पत्रकारों को बताया कि लावारिस गोवंशीय पशु पालने पर गोपालक को हर महीने नौ सौ रुपये मिलेंगे, लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि इसकी प्रक्रिया क्या है। वहीं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. टीके तिवारी ने बताया कि शासन ने गोवंशीय पशु पालने पर तीस रुपये प्रतिदिन देने का आदेश हुआ है, लेकिन अभी शासनादेश नहीं आया है।
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