बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में दिसंबर के पहले सप्ताह में यह ऐतिहासिक पल होगा, जब गैंडा पुनर्वासन योजना में पिछले 40 साल से सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रह रहे गैंडों में से चार गैंडों को जंगल में स्वछंद विचरण की आजादी मिलेगी।
किसी लुप्त प्राय प्राणी को उसके पुरखों की धरती पर बसाने की अनूठी पहल वर्ष 1984 में दुधवा में शुरू की गई थी। तराई की धरती पर करीब 200 साल पहले लुप्त हुए गैंडों को फिर से असम से लाकर दुधवा के सोनारीपुर रेंज में बसाया गया था। दुधवा में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू हुए 40 साल पूरे हो चुके हैं और गैंडों की संख्या चार से बढ़कर 46 हो गई है।
गैंडों को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से निकालकर जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़े जाने की योजना पिछले तीन-चार साल से चल रही थी। अब इसकी तारीख भी तय हो चुकी है। नवंबर की 29 तारीख से दिसंबर माह के पांच तारीख के बीच गैंडा पुनर्वासन योजना फेज वन से निकालकर तीन मादा और एक नर गैंडे को स्वछंद विचरण के लिए जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके लिए 15 गैंडों को चिह्नित किया गया है। इनमें से जो चार गैंडे पकड़ में आएंगे, उन्हें आजादी मिलेगी। संवाद
-
आजादी के पहले गैंडों को लगाया जाएगा रेडियो कॉलर
जिन गैंडों को दुधवा के जंगल में मुक्त किया जाएगा, ट्रैंक्युलाइज करने के बाद उन्हें रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। ताकि गैंडों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। इसके लिए पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
गैंडों की आजादी के लिए बनाई गईं 13 समितियां
गैंडों को जंगल में मुक्त करने की पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए कुल 13 समितियां बनाई गई हैं। यह समितियां गैंडों का चिन्हीकरण, ट्रैंक्युलाइजेशन, लाजिस्टिक ट्रांसपोर्ट, राइनो कैप्चर टीम डार्ट टीम, पशु चिकित्सक, गैंडा पहचान और रेडियोकॉलरिंग आदि का कार्य देखेंगी।
गुवाहाटी असम के गैंडा विशेषज्ञों की रहेगी मुख्य भूमिका
चार गैंडों को दुधवा के जंगल में आजादी देने के लिए गुवाहाटी आसाम के मशहूर पशु चिकित्सक एवं गैंडा विशेषज्ञ समिति में शामिल हैं। इसमें डॉ. केके शर्मा (प्रो. एंड हेड डिपार्टमेंट आफ सर्जरी एंड रेडियोलॉजी कॉलेज आफ वेटनरी साइसेंज गुवाहाटी आसाम) डॉ. विजाए गगोई (रिटायर्ड फाॅरेस्ट वेटनरी ऑफीसर स्टेट जू प्रभाग आसाम) और डॉ. खनिन चांगमई, सहायक कोऑर्डिनेटर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, इंडिया।
-
दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना से तीन मादा और एक नर गैंडे को जंगल में स्वछंद विचरण के लिए मुक्त किए जाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 29 नवंबर से पांच दिसंबर तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। गैंडों को मुक्त किए जाने का कार्य असम से आने वाले गैंडा विशेषज्ञों की निगरानी में होगा।
- ललित कुमार वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
........