लखीमपुर खीरी। जिला पंचायत राज विभाग का चार्ज संभालने के पांच दिन बाद ही प्रभारी डीपीआरओ मनोज कुमार यादव की कुर्सी भी खतरे में नजर आ रही है, क्योंकि उपनिदेशक पंचायत एके सिंह ने उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी है। पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर किट की खरीद रिपोर्ट न देने पर यह कार्रवाई हुई है, जिसके बड़े संकेत निकाले जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो यहां भी पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर खरीदने में गड़बड़झाला है, कई ग्राम पंचायतों में मनमाने रेट में भुगतान करके कमीशनखोरी की गई है।
विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई न करने के चलते शासन ने 26 अगस्त 2020 को जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) अजय कुमार श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद नौ सितंबर 2020 को डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने एडीपीआरओ मनोज कुमार यादव को प्रभारी बनाया था। इस दौरान कई जिलों में ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की खरीद में प्रधानों और सचिवों द्वारा किए गए घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को जनपद की रिपोर्ट देने के लिए उपनिदेशक पंचायत ने प्रभारी डीपीआरओ से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद कई दिनों तक रिपोर्ट न देने पर उपनिदेशक ने प्रभारी डीपीआरओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी है, जिससे पंचायत विभाग में फैली अनियमितताओं को लेकर बड़ी कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है। हालांकि ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर किट की खरीद-बिक्री रेट की बावत पहले ही शासन ने निर्देश जारी किए थे, जिसमें अधिकतम 1600 रुपये किट का मूल्य निर्धारित किया गया था। जबकि इससे पहले लॉकडाउन के दौरान ही मास्क-सैनिटाइजर की कालाबाजारी के साथ ही पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की भी कालाबाजारी शुरू हो गई थी। इससे फायदा उठाने के लिए ग्राम पंचायतों में प्रधान और सचिवों ने भी जुगाड़ बनाया और फर्मों को बाजार मूल्य से तीन गुना अधिक मूल्य का भुगतान कर दिया। इसके बाद उन्होंने फर्मों से अपने हिस्से की रकम वसूल ली। सूत्र बताते हैं कि कई ग्राम पंचायतों में किट छह से सात हजार रुपये तक में खरीदी गई है, तो कहीं तीन से पांच हजार रुपये में खरीदी है। अब एसआईटी को रिपोर्ट देने से पहले खामियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रभारी डीपीआरओ ने 2800 रुपये में किट खरीदे जाने की बात कही है, लेकिन इसमें भी गर्दन फंसना तय है। लिहाजा इस रिपोर्ट को भी दुरुस्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, एसआईटी को रिपोर्ट भेजने में हो रही देरी से अधिकारियों में खलबली बढ़ती जा रही है।
ग्राम पंचायतों का डाटा हमारे पास नहीं है। पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर किट की खरीद की रिपोर्ट सभी एडीओ पंचायत से मांगी है, जिनमें अब तक किसी ने रिपोर्ट नहीं दी है।
-मनोज कुमार यादव, प्रभारी डीपीआरओ