ग्रामीणों की शिकायत पर लोकपाल ने बिनौरा गांव पहुंचकर मनरेगा और ग्राम निधि से हुए विकास कार्यों की जांच की। इस दौरान घपलेबाजी उजागर हुई। इंदिरा आवासों के नाम पर लाभार्थियों से पैसे लेने की शिकायत ग्रामीणों ने की। जांच के दौरान कई रास्तों पर मिट्टी पटाई का कार्य दिखाकर फर्जी तरीके से भुगतान निकाल लिया गया था। लोकपाल ने कहा कि ग्राम प्रधान ने सरकारी धन का गबन किया है तथा आवास के नाम पर लोगों से पैसा लेकर उन्हें ठगी का शिकार बनाया है। ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गांव बिनौरा निवासी शकील अहमद ने ग्राम पंचायत बिनौरा में विकास के नाम पर घपलेबाजी की शिकायत लोकपाल से की थी। लोकपाल साक्षी दीक्षित गांव बिनौरा पहुंची। वहां पर उन्होंने 65 इंदिरा आवास के लाभार्थियों के बयान लिए। लाभार्थियों ने ग्राम प्रधान पर प्रति आवास पांच से दस हजार रुपये वसूलने का आरोप लगाया। शहनाज पत्नी यकीन खां, महरून निशां पत्नी बहादुर, सिरदार खां समेत करीब 15 लोगों के आवास अधूरे पाए गए, जबकि सारा पैसा आवास बनाने के लिए निकल चुका था। केसर जहां, शहनूर, शमीना समेत 105 लोगों को इंदिरा आवास देने का झांसा देकर रुपये ले लिए गए और बैंक में जाकर खाता खुलवा दिया गया। आरोप है कि एक माह के भीतर आवास आने की बात प्रधान ने कही थी, लेकिन अब तक कोई भी आवास नहीं आया है। सिद्दीक के घर से फरीद के घर नाली का कार्य हुआ। नाली अधूरी पड़ी है, लेकिन उसका भुगतान निकाल लिया गया। रमजान की मजार से रामतहलया तथा शत्रोहन के घर से पेमन लाल के घर तक मिट्टी पटाई का कार्य दिखाकर भुगतान करा लिया गया, जबकि यह रास्ता कई सालों से नहीं पाटा गया है। इसके अलावा जांच में ग्राम प्रधान ने अपने सगे भाइयों के नाम जॉब कार्ड बनवाकर सबसे अधिक काम देकर पेमेंट निकाल लिया।