बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों को कारोना संक्रमण से बचाने के लिए वाटरहोल सैनिटाइज किए जाएंगे। जिन वाटरहोल्स में पहले से पानी भरा है, उन्हें बदला जाएगा। इन्हें दोबारा भरने के पहले पंपिंगसेट और पाइपों को भी सैनिटाइज किया जाएगा।
अमेरिका के ब्रांक्स जू में एक बाघिन के कोरोना संक्रमित होने के बाद भारत के टाइगर रिजर्व और चिड़ियाघरों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके बचाव के लिए एनटीसीए से जारी गाइड लाइन को अमल में लाया जा रहा है। अब डीटीआर के वाटरहोल को सैनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिन वाटरहोल में पानी भरा हुआ है, उनमें भरा पानी निकाला जा रहा है। इसकी जगह पंपिंग सेट के जरिए ताजा पानी भरा जा रहा है। पानी भरने से पहले पंपिंग सेट और उपकरणों को भी सैनिटाइज किया गया है। आसपास के पेड़ों और वनस्पतियों को भी साफ पानी से धुल दिया गया है। पानी बदलने के काम में जो वन कर्मी लगे हैं वह भी मास्क, दस्ताने सेफ्टी सूट से लैस हैं। डीडी मनोज सोनकर ने बताया कि इस अभियान में जिन कर्मचारियों को लगाया गया है उनके स्वास्थ्य की जांच पहले ही करा ली गई है। कहीं उनके खांसी, जुकाम और बुखार आदि तो नहीं हैं।
डीटीआर में हाथियों के बेस कैंप में उनके रहने की जगह, भोजन के लिए बना मेस और चारा रखने की जगह को भी पूरी तरह सैनिटाइज किया गया है। महावत, चारा कटर्स और अन्य केयर टेकर्स पूरी तरह सुरक्षा उपकरणों से लैस हैं।
गैंडा पुनर्वासन स्थल को भी किया गया सैनिटाइज
दुधवा नेशनल पार्क में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना फेज 1 और 2 को भी पूरी तरह सैनिटाइज किया गया है। यहां लगाई गई सौर उर्जा चलित बाड़, पिलर और वाटरहोल आदि को सैनिटाइज किया जा रहा है। धवा की गैंडा पुनर्वासन योजना काफी महत्वपूर्ण है और कोरोना संक्रमण से इसे किसी तरह का नुकसान न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
एनटीसीए की गाइड लाइन के अनुसार डीटीआर में बाघ, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पूरी तरह प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए वाटरहोल को सैनिटाइज किया जा रहा है। पालतू हाथियों के रखरखाव और गैंडा पुनर्वासन योजना पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
संजय पाठक एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व।