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खीरी में नहीं थम रहा कोरोना का कहर, 22 और संक्रमित मिले

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Corona's havoc did not stop, 22 more infected
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लखीमपुर खीरी। जिले में सोमवार को लखनऊ से आई 356 लोगों की जांच रिपोर्ट में 22 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। इनमें शहर क्षेत्र के 16, पसगवां के तीन एवं फूलबेहड़, ईसानगर और मोहम्मदी ब्लॉक का एक- एक व्यक्ति शामिल है। संक्रमितों में स्वास्थ्य विभाग के तीन कर्मचारियों के होने से महकमे में अफरातफरी मच गई।
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जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि लखनऊ से आई जांच रिपोर्ट में शहर के मोहल्ला ईदगाह में नौ लोग पॉजिटिव मिले, जिनमें आठ लोग पूर्व में संक्रमित पाई गई महिला के परिवारीजन हैं। इधर, पंजाबी कॉलोनी में मां-बाप और बेेटा संक्रमित मिले हैं। वहीं बरेली से आए संकटा देवी मोहल्ला निवासी दो लोग संक्रमित हैं। सीएमओ कार्यालय का लिपिक, फरधान सीएचसी पर तैनात लैब टेक्नीशियन और पीएचसी जेबीगंज में फार्मासिस्ट, जो मोहल्ला शुक्लापुर मोहम्मदी का निवासी संक्रमित मिले है। इधर, ईसानगर ब्लॉक के गांव भेड़िइया निवासी एक युवक, जो डॉ. मनोज शर्मा के आवास विकास स्थित घर में कुक है। खंभारखेड़ा के गांव मगरेपुरवा निवासी एक महिला, जिसकी ड्रेसिंग चल रही थी, फूलबेहड़ के गांव अंजनापुर निवासी आठ साल की बालिका संक्रमित मिली है। इसी क्रम में मोहम्मदी के ब्लॉक पसगवां के सुखबसा में एक और छतौरा निवासी एक युवक संक्रमित मिला है। इनके अलावा एक कलक्ट्रेट कर्मी की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। सभी लोग होम क्वारंटीन हैं, सोमवार को कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि होने पर कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संबंधित इलाके में जाकर आसपास के लोगों की थर्मल स्कैनिंग की। डीएम ने कि जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या 176 हो गई है, जिसमें उपचार के बाद 116 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। अब 60 एक्टिव संक्रमित केस हैं जिनका उपचार कोविड अस्पताल में चल रहा है।
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कंटेन्मेंट जोन बढ़े, मगर सख्ती के नाम पर खानापूर्ति
जहां भी कोरोना संक्रमित मिले उसे कंटेन्मेंट जोन घोषित करने का निर्देश है। प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वहां गाइड लाइन का पालन कराए। इस संबंध में पहले तो खूब सख्ती हुई, लेकिन बाद में नियमों का पालन सिर्फ बैरिकेडिंग तक ही सीमित होकर रह गया। कंटेन्मेंट जोन के लोग अन्य किसी के संपर्क में न आएं इसका भी कोई इंतजाम नहीं है।
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निजी अस्पतालों में नहीं होता इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल का पालन
संक्रमण रोकने के लिए निजी अस्पतालों में इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल लागू किया गया है। अस्पताल संचालक इसका पालन करने का दावा भी करते हैं, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। बिना कोरोना जांच कराए ही गर्भवती महिलाओं के ऑपेरशन तक हो रहे हैं। इनकी मॉनिटरिंग तक नहीं होती।
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कागजों तक सीमित है होम क्वारंटीन लोगों की निगरानी
नियमानुसर संक्रमितों के संपर्क में आने वालों को होम क्वारंटीन करते हुए उनकी निगरानी की जाए, जिससे वह मोहल्ले और शहर में घूम न सकें। इसके लिए निगरानी समितियां भी बनाई गईं। मगर, निगरानी का काम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा। इस कारण सामुदायिक संक्रमण फैलने की आशंका भी बनने लगी है।
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जो मिला पॉजिटिव, बताया होम क्वारंटीन था
हाल ही दिनों में कोरोना संक्रमित मिलने वालों को जिला प्रशासन होम क्वारंटीन होना बताता रहा। मगर, मोहल्लों में हकीकत कुछ और दिखी। शहर की पंजाबी कॉलोनी में मिला संक्रमित व्यक्ति रोजाना धार्मिक स्थल में दर्शन ही नहीं करता रहा, बल्कि मोहल्ले की दुकानों पर सामान खरीदने भी जाता रहा।
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कोरोना पहुंचा सीएमओ कार्यालय, बाबू के पॉजिटिव होने से अफरातफरी
कोरोना संक्रमण की सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में सीएमओ कार्यालय के एक बाबू पॉजिटिव मिले। रिपोर्ट में आने से पहले ही वह सीएमओ ऑफिस आकर तमाम लोगों से मुलाकात भी कर चुके थे। वहीं मलेरिया अधिकारी कार्यालय के इंस्पेक्टर की मौत पर हुई शोकसभा में भी शामिल होकर उनकी अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए उनके घर के लिए भी निकल लिए। उनके जाने के कुछ देर बाद आई पॉजिटिव रिपोर्ट से कार्यालय में अफरा तफरी मच गई। जिम्मेदारों ने संक्रमित मिले बाबू को फोन कर वापस कार्यालय बुला लिया। इसके बाद मेन गेट बंद कर आवाजाही रोककर कार्यालय को सैनिटाइज कराना शुरू किया गया।
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व्यापारी बोले, दुकानें खोलने
की समय सीमा का जाए कम
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। शहर से लेकर जिले में बढ़ते संक्रमण के मामलों को लेकर व्यापारी वर्ग भी बेहद चिंतित हैं। व्यापारियों का कहना है कि संक्रमितों की संख्या बढ़ने के साथ शहर में भीड़ भी बढ़ रही है। जो चिंताजनक है। इस तरह की लापरवाही सभी को भारी पड़ेगी। मख्यमंत्री ने दो दिन का लॉकडाउन करने का जो निर्णय किया है वह सराहनीय है। संक्रमण की चेन तोड़ने में यह कारगर होगा। इसी तरह जिला प्रशासन को भी चाहिए कि दुकानों के खुलने की समयसीमा कम करे, क्योंकि शाम होते ही सड़कों पर भीड़ बढ़ने लगती है जोकि खतरनाक है। दुकानों का समय सुबह 10 से छह या फिर सुबह नौ से शाम सात बजे कर दिया जाए। व्यापारी नेताओं का कहना है कि वर्तमान समय चाट वालों और रेस्टोरेंट आदि के लिए ही लागू रखा जाए।
पहले वाला समय दुकानों के लिए ठीक था। चाट और रेस्टोरेंट वालों को जरूर दिक्कत थी। अधिकारी ऐसा समय निर्धारित करें, जिससे किसी वर्ग के व्यापारी को असुविधा न होने पाए। दुकानों का समय सुबह नौ से शाम सात बजे तक ठीक रहेगा।
-संजय अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल प्रतिनिधि कंछल गुट
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स्थिति को देखते हुए दुकानों का समय सुबह 10 से छह किया जाए, क्योंकि पहले सुरक्षा है उसके बाद व्यापार। यदि दुकानें रात भर खुलें तब भी लोग आते-जाते रहेंगे। जब समय निश्चित हो जाएगा तो लोग समय से खरीदारी कर घर में रहेंगे।
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-संजय गुप्ता कन्हैया, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन
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