महेवागंज। कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई को लेकर शासन की गाइड लाइन का पालन करने में सरकारी महकमे ही कोताही बरत रहे हैं। इसकी बानगी बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में सामने आई। प्रदेश सरकार के फरमान पर पहली जुलाई से अध्यापकों और कर्मचारियों का स्कूल में पहुंचना शुरू हो गया है। गाइड लाइन की बात करें तो पूर्व में क्वारंटीन सेंटर बन चुके विद्यालयों में स्टाफ के पहुंचने पर स्क्रीनिंग और विद्यालयों को सैनिटाइज किया जाना था। इसके इतर गाइड लाइन का पालन पहले ही दिन धराशाई हो गया। क्वारंटीन सेंटर में पहले शामिल हो चुके विद्यालयों के खुलने से पहले सैनिटाइज नहीं किया गया। बुधवार को विद्यालय पहुंचे ज्यादातर शिक्षक कोरोना को लेकर खौफ में दिखे। लॉकडाउन के दौरान करीब तीन महीने से बंद पड़े विद्यालयों में आफिस और कक्षों में जमा धूल और गंदगी को साफ कराया गया। विद्यार्थियों की डाटा फीडिंग सहित विद्यालय संबंधी काम निपटाए गए। उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव के प्रधानाध्यापक सलीम ने बताया कि पूर्व में विद्यालय को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। बुधवार को स्कूल खुलने पर किसी तरह का दवा का छिड़काव नहीं किया गया। कमोवेश यही स्थिति नकहा ब्लॉक क्षेत्र के विद्यालय पतरासी, फूलबेहड़ के ओदरहना और महेवा गांव समेत कई स्कूलों की रही।
कंटेन्मेंट जोन में भी यही हाल
फरधान के परसेहरी कला गांव में कोरोना पॉजटिव केस मिलने पर गांव कंटेंन्मेंट जोन बना है। गलियां सील है। परसेहरी गांव के ग्राम प्रधान गुरचरन सिंह ने बताया कि स्कूल सहित गांव के किसी हिस्से में दवा का छिड़काव करने कोई नहीं आया है।
विद्यालयों के खुलने से पहले उन्हें सैनिटाइज किया जाना है। इसके लिए पहले ही डीएम द्वारा पंचायत स्तर पर बीईओ और बीडीओ को निर्देश दिए चुके हैं। जल्द इसकी समीक्षा की जाएगी।
-बुद्धप्रिय सिंह, बीएसए