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उम्मीद टूटी तो मुंबई से पैदल चल दिए खीरी के 15 मजदूर

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बिजुआ (लखीमपुर खीरी)। जब सरकार से उम्मीद टूटी तो हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में बैठे खीरी के मजदूर पैदल ही चल दिए। अपने परिवार से मिलने की तड़फ और जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में मजदूर यह भी भूल गए कि उनका जिला यहां से 1266 किमी दूर है। 28 अप्रैल को महाराष्ट्र से निकले 15 मजदूर अब दो जगह बंट गए हैं, एक दल मध्यप्रदेश बॉर्डर पर है, तो दूसरा एक ट्रक पर मदद पाकर प्रयागराज पहुंच गया है।
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खीरी जिले के बिजुआ इलाके के टांगिया बस्ती के 15 मजदूर मुंबई के औरंगाबाद जिले के सतारा कस्बे में लॉकडाउन के चलते फंसे थे। महाराष्ट्र में यह मजदूर भवन निर्माण का कार्य करते थे। देश में लॉकडाउन के चलते एक छोटी सी कोठरी में गुजर बसर कर रहे मजदूरों के पास खाने को कुछ नहीं बचा था। उनके सेठ ने पहले लॉकडाउन तक मदद की, बाद में कहा कि अपना इंतजाम कर लें। गोला तहसील के टांगिया वन बस्ती के मजदूर श्रवण, हरिभजनलाल, गोवर्धन, रामभुवन, पप्पू, गूड्डू, गोविंद, संतोष, आकाश, मनोज, मुकेश, हरेंद्र कुलदीप और संतोष कुमार ने फोन पर बताया कि जिस जगह पर यह लोग थे वहां कोरोना के मरीज की संख्या बढ़ रही थी। खोली (कोठरी) के बाहर जाने पर संक्रमण का खतरा था। वहीं सरकार की तरफ से 28 तारीख तक भी उन लोगों को वापस लाने की घोषणा न होने पर वह नाउम्मीद हो गए थे। वहां रहकर कोरोना संक्रमण का डर और इधर घर वालों की फिक्र से वह पैदल ही चल दिए। दो दिन चलने के बाद 30 अप्रैल को एक कैंप में खाना मिला। कुछ दवाएं भी मिलीं। यूपी बॉर्डर के करीब पहुंचने की लालसा में एक ट्रक में सात लोग बैठ लिए, मध्यप्रदेश बॉर्डर पर एक जगह पुलिस ने रोक लिया। यहां से तसल्ली मिली है कि उन्हें यूपी भिजवाया जाएगा। दूसरे दल के आठ लोगों को गुरुवार शाम को प्रयागराज आ रहा ट्रक मिल गया। यह लोग शनिवार सुबह तक प्रयागराज पहुंच जाएंगे। सभी को उम्मीद है कि वे जल्द खीरी में अपने घर पहुंच जाएंगे।
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