लखीमपुर खीरी। इस्लाम में रमजान इबादत का विशेष महीना है और रोजे को इस्लाम की महत्वपूर्ण इबादत माना गया है। इस्लाम धर्म के धर्मगुरुओं, मौलानाओं एवं रोजेदारों का कहना है कि रोजे का मकसद अल्लाह के सामने संपूर्ण समर्पण करना है। ऐसा कोई काम न किया जाए, जिससे रब नाराज हो और मानवता की तकलीफ, परेशानी का जरिया बने। ऐसे में शनिवार को रोजेदारों ने लॉकडाउन का पालन करते हुए पहले रोजा रखा।
जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना इशहाक ने रोजेदारों से अपील की है रमजान अल्लाह की इबादत का महीना है। घर पर ही रहकर तरावीह करें। भीड़ न लगाएं, गरीबों का ख्याल रखें। इस मुबारक महीने में अल्लाह से दुआ करें कि जल्द से जल्द से इस मुसीबत से हमारे मुल्क और इंसानियत को छुटकारा मिले।
रोजेदारों ने कहा-लॉकडाउन का पालन करते हुए रखा पहला रोजा
शहपुरा कोठी निवासी रोजेदार महबूब अहमद बताते हैं कि लॉकडाउन से कोई विशेष दिक्कत नहीं है। घर पर तरावीह की नमाज पढ़ी। बाजार बंद होने के कारण सहरी और इफ्तार के लिए सामान मिलने में दिक्कत जरूर हुई। सभी से अपील है कि इस पाक महीने में गरीबों का ध्यान रखें।
हिदायत नगर निवासी रोजेदार तनवीर अहमद का कहना है कि लॉकडाउन का कोई विशेष प्रभाव नहीं है। लोगों को चाहिए कि इसका पालन करें। घर से बाहर निकलने पर सामाजिक दूरी का पालन करें। कोरोना से मुल्क को छुटकारा दिलाने के लिए खुदा से इबादत करें।
रोजेदार पालिका सदस्य अनीस अहमद खां का कहना है कि तरावीह की नमाज के लिए मस्जिदों में जमा न हों, घर पर नमाज अदा करें, साथ ही ध्यान रखें कि भीड़ जमा न हो। रमजान के पहले दिन लॉकडाउन का पालन करने में कठिनाई तो हुई लेकिन सहरी और इफ्तार में सामाजिक दूरी का घर के अंदर पालन किया गया और नमाज भी घर में ही पढ़ी गई।
गोला निवासी जामा मस्जिद प्रेसिडेंट हाजी सलीम अंसारी का कहना है कि रमजान के पाक महीने में गरीबों, कमजोरों, जरूरतमंदों का ख्याल रखें। कोई भूखा न रहे, चाहे वह किसी धर्म जाति का हो। शासन प्रशासन की मदद करते हुए घरों में नमाज पढ़ें। गर्मी में रोजेदारों को दिक्कत तो होती है लेकिन हताश होने की जरूरत नहीं है।
मोहल्ला मुन्नूगंज निवासी मौलाना हारुन रसीद असीम का कहना है कि रमजान में इफ्तार पार्टी हरगिज न करें। सामाजिक दूरी बनाए रखें। सहरी के समय रोजेदारों को जगाने के लिए लाउडस्पीकर का कम से कम प्रयोग करें, ताकि बीमारों, गैर रोजेदारों को परेशानी न हो। पहला रोजा घर परिवार के लोगों के साथ लॉकडाउन का पालन करते हुए रखा।
गोला निवासी रोजेदार असलम खान का कहना है कि रमजान अल्लाह की इबादत का सबसे खास महीना है और रोजा अल्लाह की खास इबादत। कोई काम ऐसा हरगिज न करें जिससे किसी को परेशानी हो। लॉकडाउन से रोजेदारों को दिक्कत तो हो रही है लेकिन महामारी से बचने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखना जरूरी है।