लखीमपुर खीरी। निराश्रित एवं बेसहारा गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के उद्देश्य से निर्मित जनपद में दो वृहद गोशालाओं का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक उनका संचालन शुरू नहीं हो सका है।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इन गोशालाओं को संबंधित संस्थाओं के सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया अधर में लटकी है। इससे पशु संरक्षण की योजना का लाभ फिलहाल धरातल पर नहीं उतर पा रहा है।
विकासखंड ईसानगर के समैसा गांव और मितौली तहसील के औरंगाबाद ग्राम पंचायत में 400-400 पशुओं की क्षमता वाली दो गोशालाओं का निर्माण कराया गया है।
दोनों परियोजनाओं पर करीब 3.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यानी प्रति गोशाला का निर्माण 1.60 करोड़ खर्च हुए हैं। निर्माण कार्य पूरा हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इन गोशालाओं का हैंडओवर नहीं किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, ईसानगर स्थित गोशाला का निर्माण वर्ष 2024-25 में कराया गया था, जबकि औरंगाबाद की गोशाला भी लंबे समय से तैयार खड़ी है।
इसके बावजूद दोनों परिसरों में पशुओं को रखने की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। इससे एक ओर जहां बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं, वहीं किसानों को फसलों के नुकसान की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।
हैंडओवर प्रक्रिया में तकनीकी औपचारिकताओं, विभागीय स्वीकृतियों या आवश्यक सुविधाओं के अधूरे होने जैसी वजहें बाधा बन रही हैं। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से अभी तक स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि आखिर किस कारण दोनों गोशालाओं को संचालित नहीं किया जा सका है। सीवीओ डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि दोनों गोशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। हैंडओवर प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है।