तहसील में हुए बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। उधर भारतीय स्टेट बैंक में फर्जी खाते खोलने के मामले में बैक की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर पुलिस की जांच भी आगे नहीं बढ़ पाई है। अभी तक न तो लेखपाल गिरफ्तार हुए हैं न दलाल। जबकि जांच में दोनों की मिली भगत सामने आई है। आरोप है कि सत्ता पक्ष के दबाव में जांच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
बाढ़ राहत घोटाले के जांच अधिकारी एसडीएम ने जांच ठंडे बस्ते में डाल रखी है। इससे लेखपालों के हौसले बुलंद हैं।
यहां बता दें कि वर्ष 2013-14 में बाढ़ से तबाह हुई फसलों के एवज में किसानों में बंटने के लिए जो राहत राशि आई थी, उसमें से तमाम किसानों के चेक लेखपालों ने दलालों के हाथ बेच दिए थे। इन दलालाें ने लाभार्थी किसानों के नाम से फर्जी आईडी के सहारे बैंक में खाते खोल कर पैसे निकाल लिए थे। इस बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद एसडीएम को मामले की जांच सौंपी गई है।
पिछले दो माह से चल रही जांच में लेखपालों और तहसील के ही कुछ राजस्व अधिकारियों के नाम सामने आने पर प्रशासनिक जांच ढीली पड़ गई। लेखपालों को बचाने के लिए जांच अधिकारी ने भारतीय स्टेट बैंक से दलालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। इस मामले की जांच पुलिस कर रही है लेकिन अब तक इस मामले में किसी दलाल की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
मामले को दबाने की कोशिश में है प्रशासन
मामले को दबाने के प्रयास में जांच अधिकारी ने फर्जी आईडी बनाने वाले रैकेट का खुलासा नहीं किया है। जांच अधिकारी को डर है कि यदि फर्जी आईडी बनाने वाले रैकट का भंडाफोड़ हुआ तो फर्जी आईडी के सहारे तहसील में हुए दूसरे घोटालों का भी खुलासा होगा और इसमें लेखपालों के साथ कई अफसरों की गर्दन फंस सकती हैं, जो जांच अधिकारी नहीं चाहते। इसीलिए दलालों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
जांच में लीपापोती पर नाराज हैं कई संगठन
बाढ़ राहत घोटाले में लीपापोती पर कई संगठनों ने नाराजगी जताई है। बाढ़ राहत आपदा संगठन, युवा एकता मंच, व्यापार मंडल निघासन ने जांच में देरी होने को संदेहास्पद बताते हुए निष्पक्ष जांच और घोटाले में दोषी लेखपालों और दलालों पर कार्रवाई की मांग की है। इस बाबत यह संगठन मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने वाले हैं।
एसडीएम निघासन पीके सिंह ने बताया कि दूसरे प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के कारण मामले की जांच पूरी होने में देरी हो रही है। जल्दी ही जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। जांच में जो दोषी मिलेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।