जिला जेल में विचाराधीन और सजायाफ्ता महिला बंदियों के एक नए जीवन की शुरुआत हो रही है। डीएम किंजल सिंह ने यूपी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘प्रेरणा’ के तहत उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की है। इसके लिए महिला बैरक में नया सबेरा कार्यक्रम के तहत दो सहायता समूहों का गठन किया गया है।
कैंप कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीएम ने बताया कि इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी रुचि के अनुसार सात महिलाओें को ब्यूटीशियन, 31 महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और आठ महिलाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाएगा। जेल की 27 महिला बंदियों को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की ओर से प्रशिक्षित किया जा चुका है। इन्हें बालिकाओं की यूनिफार्म सिलने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
जेल में मिलेगा रोजगार
जिले में कुल 16 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं। इनकी 1600 छात्राओं के लिए कुल 3200 यूनिफार्म यह महिला बंदी तैयार करेंगी। इसका भुगतान जेल की महिला स्वयं सहायता समूह को किया जाएगा। जेल बंदियों की यूनिफार्म भी यह महिला बदी ही सिलेंगी। इससे यह जेल में रहकर अच्छी कमाई कर सकेंगी।
बैरक में यह होंगी सुविधाएं
-महिला बैरक में लगेगी एलईडी।
-बच्चों के लिए झूले और अन्य मनोरंजक सामग्री।
-ठंडे और साफ पानी के लिए वाटर कूलर।
-24 घंटे रोशनी के लिए सोलर।
-प्रेरक भजन और गीत के लिए म्यूजिक सिस्टम।
-महिलाओं और बच्चों के लिए शिक्षक की व्यवस्था।
-गीत-संगीत और प्रार्थना की शिक्षा।
-आजीविका के लिए बनेगा वर्क शेड।
-महिला बैरक में लगेंगे छह कूलर।