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‘आरटीई एक्ट का हर हाल  में कराया जाएगा पालन’

Wed, 11 Jan 2017 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर खीरी।
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- फोटो : डेमो फोटो
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अलाभित और दुर्बल वर्ग के 25 फीसदी बच्चों को प्राइवेट विद्यालयों में प्रवेश का मामला
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बीएसए ने कहा, सीबीएसई/आईसीएसई मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर रहेगा जोर
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने में अभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट विद्यालयों ने दरवाजे बंद कर रखे हैं। एक्ट के लागू होने के करीब पांच साल बाद भी प्रबंधन तंत्र अपनी दलीलों के आगे नियम-कानूनों को दरकिनार करता आया है। अब बीएसए संजय कुमार शुक्ला ने एक बार विद्यालयों के प्रबंधन की कार्यशाला कराकर मसले का हल निकालने की रणनीति बनाई है। ताकि प्राइवेट विद्यालयों में जरूरतमंद 25 फीसदी विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाना सुनिश्चित किया जा सके। 
आरटीई एक्ट के मुताबिक बगैर एडेड मान्यता प्राप्त विद्यालयों को भी प्राथमिक कक्षा में कम से कम 25 फीसदी बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है, जिसमें अलाभित समूह और निर्बल वर्ग की पात्रता रखने वाले परिवारों के बच्चे पात्र होंगे। इसके लिए अभिभावक बीएसए कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं, जहां आवश्यक कार्यवाही पूरी कराने के बाद बच्चे को संबंधित विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाएगा। बच्चे की फीस के तौर पर सरकार द्वारा निर्धारित धनराशि बीएसए कार्यालय संबंधित विद्यालय को भुगतान को करेगा। अभी तक किसी भी विद्यालय ने आरटीई एक्ट का अनुपालन नहीं किया है। कुछ विद्यालयों ने खानापूर्ति के नाम पर सिर्फ 18 बच्चों का दाखिला किया है। इसमें लखीमपुर के माधव चिल्ड्रेंस एकेडमी, लखीमपुर पब्लिक स्कूल, एस राम पब्लिक स्कूल देवकली रोड और डॉ हेडगेवार सरस्वती शिशु मंदिर ने एक-एक बच्चे को प्रवेश दिया है। इसी तरह मैलानी स्थित अतुल महादेव एकेडमी ने दो, बांकेगंज स्थित लल्लूराम मेमोरियल पब्लिक स्कूल ने तीन, चंदनचौकी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर ने छह, मैलानी स्थित लिटिल रोजेज एकेडमी ने एक, मैलानी स्थित विजयपाल विद्या मंदिर ने दो बच्चों को प्रवेश दिया है। 
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अभिभावकों और प्रबंधन में शायद जागरूकता का अभाव है, जिसे दूर करने के लिए कार्यशाला कराई जाएगी। एक्ट के अनुसार सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को 25 फीसदी प्रवेश करना अनिवार्य है। हमारे कार्यकाल में ही अभी 18 बच्चों को प्रवेश दिलाया गया है। नए सत्र में प्रवेश की संख्या में आश्चर्यजनक वृद्धि होगी। 
-संजय कुमार शुक्ला, बीएसए 
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