लखीमपुर खीरी। मैगलगंज स्थित गन्ना विकास समिति में किसानों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। किसानों द्वारा कई बार कागज देने पर भी सट्टे की त्रुटियों का सुधार नहीं किया जा रहा है। गन्ना सर्वे के दौरान भारी गड़बड़ियां करते हुए पर्यवेक्षकों ने किसानों का गन्ने का प्लॉट पड़ोसी किसान के सट्टे में शामिल कर दिया है, तो कुछ किसानों के सट्टे पर उनका प्लॉट चढ़ाया नहीं गया है।
किसानों को पर्चियां जारी करने के लिए चीनी मिलों से दो साल पहले अधिकार हटाकर गन्ना विभाग ने गन्ना समितियों को दे दिया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी गन्ना किसानों की समस्याओं का जल्द निराकरण हो सकेगा, लेकिन हालात अभी भी जस के तस बने हुए हैं। गन्ना विभाग ने समितियों में सट्टा प्रदर्शन कराकर सुधार के निर्देश दिए हैं, लेकिन समिति के कर्मचारी/अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं। किसानों द्वारा जमा किए जाने वाले कागजों को गायब कर दिया जाता है। मितौली क्षेत्र के दर्जनों गांवों के 500 से अधिक किसानों के सट्टे में गड़बड़ी की शिकायतें गन्ना समिति तक मितौली क्षेत्र में कार्यरत कामगारों के जरिए भेजी जाती है, लेकिन मैगलगंज समिति से किसानों के कागज ही गायब कर दिए जाते हैं। एक पर्यवेक्षक ने बताया कि समितियों में फीडिंग कार्य होता है, जहां पर कर्मचारी लापरवाही कर रहे हैं। इससे किसानों की समस्याएं दूर नहीं हो पा रही हैं।
20 से 25 प्रतिशत किसानों के घोषणा पत्र जमा नहीं हुए हैं। मैगलगंज समिति क्षेत्र में सर्वे के दौरान जो किसान अनुपस्थित रहे, उनके सर्वे में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इसलिए सभी समितियों पर सट्टा प्रदर्शन कराया जा रहा है, जिसमें किसान अपना कैलेंडर अवश्य प्राप्त करें। जो किसान घोषणा पत्र या कोई अन्य अभिलेख जमा करते हैं, तो संबंधित कर्मचारी से उसकी रिसीविंग जरूर प्राप्त करें।
ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी