गरीब और असहाय लोगों के लिए यहां बनाया गया रैन बसेरा महज खानापूर्ति के लिए बनाया गया है। सूरज ढलते ही रैन बसेरा के मेन गेट पर ताला जड़ दिया जाता है। एक लावारिस वृद्ध महिला रात भर ठंड से ठिठुरती रही। बुधवार की सुबह जब मोहल्ले वालों ने देखा तो उसको कंबल आदि से ढका और आग जलाई। हालत खराब होने पर लेखपाल को सूचना दी गई। लेखपाल ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
बेसहारा और गरीब लोगों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन ने अलाव और रैन बसेरा खुलवाए हैं। यहां पर अलाव तो कहीं नहीं जलाए गए हैं, लेकिन कस्बे के पलिया रोड स्थित सपा कार्यालय के बगल वाले बरामदे में रैन बसेरा बनाया गया है। आरोप है कि यह रैन बसेरा खुले बरामदे में बने हैं। यहां पर एक बोझ धान का पुआल पड़ा है। यहां पर न रजाई है और न ही गद्दा है। शाम होते ही रैन बसेरा के मेन गेट पर ताला लटका दिया जाता है। सुबह करीब नौ बजे रैन बसेरे का गेट खुलता है। मंगलवार रात एक अज्ञात महिला पलिया बसड्डे के पास स्थित रामपाल के घर के पास रात भर ठंड से ठिठुर रही थी। सुबह मोहल्ले वालों ने देखा तो कंबल आदि ओढ़ाकर आग जलाई। उससे लोगों ने जानकारी लेनी चाही लेकिन वह ठंड के कारण कुछ नहीं बोल पाई। इसकी सूचना पर लेखपाल रामदुलारे ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया। सीएचसी के डॉक्टर प्रमोद रावत ने बताया कि वृद्ध महिला को ठंड लग गई है। हालत अधिक खराब होने के कारण उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया है। लेखपाल ने बताया कि वृद्ध महिला के बारे में जानकारी ली जा रही है। उसका पता ठिकाना नहीं मिल रहा है।
एसडीएम शिशिर कुमार ने बताया कि रैन बसेरा में ताला लगाना गलत है। वहां पर यदि सिर्फ पुआल रखा गया है तो जांच की जाएगी। अलाव भी जलवाए जाएंगे।