ओपीडी कक्ष में ईसीजी स्लिप का अध्ययन करते फिजीशियन डॉ. रोहित पाठक: संवाद
ओयल। सर्दियों में हृदय व उच्चय रक्तचाप संबंधी मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने से जिला अस्पताल में ईसीजी की जांचें भी गर्मियों की अपेक्षा करीब-करीब दो गुनी हो गई हैं। ऐसे मरीजों को डॉक्टर सर्वप्रथम जांच कराने की सलाह देते हैं। इससे बीमारी की गंभीरता का पता चल सके और इसकी रोकथाम के लिए सही समय पर सही इलाज किया जा सके।
अस्पताल के पर्चा काउंटर पर मंगलवार को 1110 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ। इससे सुबह से ही डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष के सामने मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर रोहित पाठक ने बताया कि ठंड में लोगों की एक्टिविटी (गतिविधि-क्रियाकलाप) में कमी आती है, जिससे कई बार रक्त गाढ़ा हो जाता है। धमनियां सिकुड़ने लगती हैं। लोगों में हृदय रोग व उच्च रक्तचाप तथा सांस की समस्याएं बढ़ जाती हैं।
ऐसे मरीजों को ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) की जांच कराने से उनकी समस्या की गंभीरता का पता चलता है। 70 से 80 मरीज प्रति दिन ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जिसमें से करीब 12-15 मरीजों को ईसीजी कराने की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती हैं कि साफ-स्वच्छ गर्म कपड़ों से शरीर को ढक कर रखें।
सुबह-शाम जब ठंड़ अधिक होती है तो टहलने से बचें, ठंडे पेय व खाद्य पदार्थ के सेवन से बचें। तला-भुना, मैदा युक्त खाद्य पदार्थ खाने से बचें, सलाद का अधिक सेवन करें, सूप पिएं, नियमित व्यायाम करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। गुनगुना अथवा ताजा पानी पिएं। सुबह की धूप सेंके, खुली व ठंड़ी हवा से बचाव रखें, शराब आदि नशीले पदार्थों का इस्तेमाल न करें।
यदि फिर भी किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो तत्काल अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज प्रारंभ करें, स्वयं से किसी भी दवाओं को खाने से बचें।