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कटान से शारदा नदी में समाए छह घर

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लिलौटी नाथ शिव मन्दिर मार्ग पर गड्ढों से गुजरती कार। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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महेवागंज (लखीमपुर खीरी)। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम ग्रंट 12 में शारदा नदी का तांडव जारी है। बीते 48 घंटों में प्रभु, राधेश्याम, पप्पू , बैजनाथ, सीताराम और जोगिंदर के घर नदीं में समा चुके हैं। ग्रामीण मलबा और गृहस्थी का सामान समेट कर गांव छोड़कर जाने लगे हैं।
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गांव में कच्चे- पक्के समेत करीब 45 मकान हैं। फूलबेहड़ के करदिया मानपुर गांव निवासी रविंद्र यादव ने बताया कि गांव का पूरबी हिस्सा फूलबेहड़ तो पश्चिम क्षेत्र निघासन तहसील में आता है। ग्रंट 12 गांव में नदी रिहायशी इलाके को तबाह करने पर तुली है। बीते कुछ घंटो में नदी छह पक्के घरों को लील चुकी है। नदी जिस तरह कटान कर रही है, उससे पूरब की ओर बसे लोगो में भी बेचैनी है, जिससे मंझरी अहिराना गांव का अस्तित्व भी संकट में है। राजस्व कर्मी गांव में पीड़ितों की सूची बना रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो बारिश का मौसम दूसरे नदी के कटान करने से लोग परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन बाढ़ कटान रोकने के कोई इंतजाम नही कर रहा है।
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शारदा नदी का जलस्तर कम पर अब शुरू हुआ कटान
पलियाकलां। शारदा नदी का जलस्तर दो दिनों से गिर रहा है, लेकिन अब नदी ने कटान तेज किया है। इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर तीन-चार फुट पानी चल रहा है।
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शुक्रवार को शारदा नदी का जलस्तर 153.810 सेंटीमीटर पर था। यह खतरे के निशान से नीचे है लेकिन उतरते हुए नदी के पानी ने अब तेजी से कटान शुरू कर दिया है।
नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर से इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर तीन-चार फुट पानी चलने लगा है, जिससे लोग अब कई किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर भीरा होकर जा रहे हैं। वहीं किसानों को चारा आदि लाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
उधर दौलतापुर, मटैहिया, बोझवा, इमलिया फार्म के किनारों पर भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत है। इसके अलावा खेतों में लगाई गई धान की चैनी भी डूब गई है। मटैहिया निवासी किसान पप्पू की ढाई एकड़ व जसपाल सिंह की करीब दो एकड़ लगी धान की चैनी को नदी ने अपने आगोश में ले ली है।
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शारदा नदी का जलस्तर घट-बढ़ जरूर रहा है लेकिन किसी गांव में बाढ़ का खतरा नहीं है, जो मार्ग नीचे हैं उन पर जलभराव हो गया लेकिन बाकी स्थिति सामान्य है। प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर रखे है।
-आशीष कुमार सिंह, तहसीलदार
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रामनगर बगहा गांव के 15 घरों को घाघरा नदी का खतरा
धौरहरा। पांच दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ने से जहां इलाके में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, वहीं घाघरा नदी ने भी कटान तेज कर दिया है।
बुधवार को घाघरा नदी ने रामनगर बगहा में बने बांध को काटना शुरू कर दिया, जबकि बृहस्पतिवार को बाछेपारा में घाघरा नदी ने करीब पचास मीटर बंधे को काट दिया था, जिससे ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ खंड विभाग बचाव कार्य मे सिर्फ खाना पूर्ति कर रहा है।
यहां जगदीश, रामस्वरूप, मनोहर, चुन्नीलाल, शारदा, सुनील, अनिल, विमलेश, मुन्नीलाल, भगौती प्रसाद, मनोज, नवल अवस्थी, मुक्ता आदि के करीब 100 बीघा खेत नदी में कट गए हैं। वहीं, रामनगर, बगहा व घोसियाना के संबारी, मनोहर, सर्वेश, सुनील, भगौती, मनोज, कमलू, वसीर, मुनेश्वर, कनौजी, चुन्नीलाल, तौफीक, काले, अन्नू के घर घाघरा नदी के निशाने पर हैं, जो कभी भी कट सकते है। जबकि, बाढ़ खंड विभाग की ओर से बोरियों में बालू व सीमेंट भरकर और पिलर में बांस की लकड़ी बांध कर कटान रोकने की कोशिश की जा रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि इसी तरह अगर बचाव कार्य चलता रहा तो गांव का वजूद मिट जाएगा।
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कहीं भी बंधा कटान की सूचना नहीं है और न ही कहीं कटान हो रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है, लगातार नजर रखी जा रही है। बचाव कार्य चल रहा है।
-राजीव कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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