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खतरा बढ़ा: खीरी के पानी में 750 तक टीडीएस

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लखीमपुर खीरी। खीरी जिले का पानी लोगों को बीमारियों की सौगात दे रहा है। हैंडपंप के पानी में कुल घुलनशील तत्वों (टीडीएस) की मात्रा मानक से दोगुने से अधिक पाई गई है, जिससे ज्यादातर ब्लॉकों का पानी खारा हो गया है। पानी में घुलनशील तत्वों की मात्रा 150 से 350 टीडीएस तक होनी चाहिए, लेकिन लैब जांच में 700 से 750 टीडीएस पाया गया है। इससे लोगों को पेट संबंधी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं हड्डी व त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा बना हुआ है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की मोबाइल लैब ने तीन दिनों तक लखीमपुर शहर समेत गोला, सिकंद्राबाद, मितौली तहसील के बेहजम, कस्ता और मैगलगंज में खाद्य पदार्थों समेत पानी के नमूनों की जांच की। शहर के हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में टीडीएस की मात्रा दोगुने से अधिक पाई गई, जिसमें सोडियम बाई कार्बोनेट (सोडा) समेत फ्लोराइड, मैग्रीशियम, आर्सेनिक आदि तत्व शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक वर्मा ने बताया कि अभी साधारण जांच में टीडीएस की मात्रा अधिक पाई गई है, जिसमें कई घुलनशील तत्वों की मात्रा अधिक पाई गई है। फ्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होने से लोगों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि आरओ के पानी में टीडीएस की मात्रा ठीक पाई गई है। इंडिया मार्का हैंडपंप व साधारण हैंडपंप से निकलने वाला पानी ज्यादा टीडीएस होने के कारण खारा हो चुका है। जो फिल्टर करने के बाद ही पीने योग्य है। तराई क्षेत्र की ब्लॉक ईसानगर, धौरहरा, पलिया, निघासन, रमियाबेहड़, बिजुआ क्षेत्रों में भी हैंडपंपों से निकलने वाला पानी खारा हो चुका है, जिसमें टीडीएस की मात्रा कई गुना अधिक है।
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आरओ का प्रयोग कर कम करें टीडीएस
पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक होने से सबसे ज्यादा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बीमारियों का खतरा है। आरओ के माध्यम से पानी को फिल्टर करकेे पीने की सलाह विशेषज्ञ देते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक वर्मा ने बताया कि आरओ के पानी में टीडीएस की मात्रा संतुलित रहती है। जो लोग आरओ नहीं लगवा सकते, वो पानी को उबालकर पियें।
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अधिक टीडीएस का पानी नुकसानदेह
अधिक टीडीएस वाला पानी पीने से शरीर को काफी नुकसान हो सकता है। इससे पीलिया, टाइफाइड, पेट के रोग व हड्डियों में दर्द, त्वचा के रोग पनपने लगते हैं। खारे पानी में नहाने से बाल जल्द पकने लगते हैं और झड़ भी सकते हैं। अधिक फ्लोराइड से शरीर को लकवा भी मार सकता है। जबकि आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से त्वचा रोग व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां पनप सकती हैं।
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-डॉ अमित सिंह, चिकित्सक, सीएचसी
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