लखीमपुर खीरी। आर्थिक संकट से जूझ रही नगर पालिका ने आय बढ़ोतरी की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए ऐसे 85 भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है जो अपने मकानों का उपयोग व्यावसायिक तौर पर कर रहे हैं।
शहर में कई लोग ऐसे हैं, जिनके मकानों में होटल, दुकानें, अस्पताल, शॉपिंग माल और बरातघर चल रहे हैं। मगर, नगर पालिका में गृहकर और जलकर आवासीय का ही जमा किया जा रहा है। कोरोना काल में शासन से बजट में कटौती किए जाने से नगर पालिका के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में पालिका प्रशासन ने नगर पालिका की आय बढ़ाने के लिए आवासीय भवन का व्यावसायिक तौर पर उपयोग करने वाले करीब 85 लोगो को चिह्नित कर नोटिस जारी किया है। इसको लेकर इन सब में हड़कंप मच गया है। बताते हैं कि हर दो साल पर टैक्स रिवाइज होना चाहिए, लेकिन कुछ लोगों ने सालों से इसे रिवाइज ही नहीं कराया। घर में अस्पताल, बरात घर और मॉल खुलवाकर खुद तो कमाई कर रहे हैं, लेकिन नगर पालिका में आवासीय भवन का टैक्स जमाकर हर साल लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। ऐसे में नोटिस जारी होने से आवासीय भवन का कामर्शियल उपयोग करने वाले भवन स्वामियों में हड़कंप है।
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ईमानदारी से टैक्स वसूली हो तो बढ़ेगी आय
नगर पालिका अगर ईमानदारी से व्यावसायिक भवनों से टैक्स की वसूली करे तो आय में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। स्वकर व्यवस्था के तहत सर्किल रेट के हिसाब से भवनों का कामर्शियल उपयोग करने वालों को व्यावसायिक मकान पर लागू टैक्स का करीब दस गुना टैक्स देना होगा। इससे नगर पालिका को लाखों रुपये की हर साल आय होगी। इससे शहर को साफ सुथरा रखने से लेकर स्मार्ट बनाने के लिए नगर पालिका प्रशासन को धन के लिए शासन को मुंह नहीं ताकना होगा।
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सिर्फ कहने को मकान
शहर के तमाम भवन स्वामियों ने मकान में या तो दुकानें बनवा दी हैं या फिर शॉपिंग मॉल। इनका उपयोग तो व्यवसायिक में हो रहा है, लेकिन नगर पालिका के रिकार्ड में आवासीय दर्ज हैं। इसमें कई भवन रसूखदारों के भी हैं, जिन पर नियमानुसार टैक्स लगाने की पालिका प्रशासन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। नगर पालिका में करीब 10 प्रतिशत आवास ही व्यावसायिक में दर्ज हैं, जबकि इनकी संख्या करीब 30 प्रतिशत तक है।
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गैर आवासीय भवन में होटल, मैरिल लॉन, अस्पताल, मॉल, नर्सिंग होम सहित करीब 85 लोगों को गृहकर और जलकर को लेकर नोटिस जारी किया गया है। इन पर नियमानुसार कर निर्धारण होगा।
-आरआर अंबेष, अधिशाषी अधिकारी