लखीमपुर खीरी। बाजार में बिकने वाले कच्चे मीट और चिकन (मुर्गे का मीट) के नमूने लैब से जांच के लिए जाएंगे। एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को कच्चे मीट का नमूना भरने के लिए प्रशिक्षण दिया है, जिससे जल्द ही बाजार में बिकने वाले कच्चे मीट के नमूने लिए जा सकेंगे।
बाजार में बिकने वाले कच्चे मीट की गुणवत्ता को लेकर अभी तक कोई जांच का प्रावधान नहीं था, लेकिन अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कच्चे मीट के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजेगा, जिसके लिए लखनऊ, गोरखपुर, झांसी, वाराणसी, आगरा और मेरठ की लैब को मीट नमूनों की जांच के लिए तैयार किया जा रहा है। अभिहित अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि बाजार में बिकने वाले बकरे, भैंस और मुर्गे के मीट किन हिस्सों से सैंपल लिया जाना है, उसके बारे में सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रशिक्षण के माध्यम से जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि बकरे के चार पार्ट जैसे गर्दन, सीना से लेकर रान तक के अलग-अलग हिस्सों से सैंपल लिए जाएंगे। इसी तरह डिब्बाबंद मीट के भी नमूने लिए जाएंगे। यही नहीं, अगर किसी दुकान पर डिब्बाबंद मीट के 10 डिब्बे हैं, तो सभी में से सैंपल लिया जाएगा। उन्होंने बताया मीट के सैंपल में प्रिजर्वेटिव का प्रयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे आइसबॉक्स में रखकर शीघ्र लैब भेजा जाएगा। एक सैंपल के लिए कम से कम 500 ग्राम मीट लिया जाएगा।
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पशुवध मामलों में होती है फोरेंसिक लैब में जांच
अभिहित अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि पशु वध के मामलों में मीट के नमूनों की जांच फोरेंसिक लैब में कराई जाती है, जहां पशु चिकित्सक सैंपल की जांच करते हैं। अब खाने वाले मीट की जांच के लिए राजकीय लैब में व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं। संवाद