लखीमपुर खीरी। गन्ना पेराई सत्र 2020-21 प्रारंभ हो चुका है, जिसके साथ ही सैकड़ों किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मैगलगंज गन्ना समिति ने सैकड़ों किसानों के सट्टे बंद कर दिए हैं, जिससे उन्हें पर्ची नहीं मिल रही हैं। जबकि किसानों ने सर्वे के समय आवश्यक प्रपत्र समेत घोषणा पत्र भी जमा किए थे। कई किसानों ने दोबारा भी घोषणा पत्र जमा किया, फिर भी सट्टा बंद करके किसानों को परेशान किया जा रहा है।
गन्ना आयुक्त एक तरफ गन्ना किसानों की समस्याएं घर बैठे दूर करने के लिए कॉल सेंटर संचालित करवा रहे हैं, तो वहीं गन्ना विकास समितियों के कर्मचारी/अधिकारी शोषण पर उतारू हैं। मैगलगंज गन्ना समिति में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जहां के सैकड़ों किसानों के सट्टे बंद कर दिए गए हैं। इस समिति से जुड़े किसान अजबापुर चीनी मिल को गन्ना सप्लाई करते हैं, जो तीन नवंबर से पेराई सत्र प्रारंभ कर चुकी है। इससे जिन किसानों के सट्टे बंद कर दिए गए है, उन्हें क्रशर/कोल्हुओं पर औने-पौने दामों पर गन्ना बेचना पड़ रहा है। ई-गन्ना एप पर ऐसे किसानों का डाटाबेस शो नहीं हो रहा है, बल्कि घोषणा पत्र जमा न किए जाने के कारण सट्टा बंद किए जाने की जानकारी दी जा रही है। मितौली, फत्तेपुर, औरंगाबाद और मैगलगंज क्षेत्र के सैकड़ों किसान इस परेशानी से जूझ रहे हैं। चीनी मिल के एक कर्मचारी ने बताया कि उसने स्वयं गन्ना समिति कार्यालय में जाकर कई किसानों के घोषणा पत्र दोबारा जमा कराए, लेकिन उनकी फीडिंग नहीं कराई गई। अब उन किसानों के घोषणा पत्र भी गायब हो गए हैं।
उधर, जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि जिन किसानों के घोषणा पत्र जमा नहीं हुए हैं, उनके सट्टे बंद किए गए हैं। कुछ किसानों ने मैगलगंज गन्ना समिति में घोषणा पत्र जमा न करके अजबापुर मिल के कर्मचारियों को दिए थे, जिससे घोषणा पत्र जमा नहीं हो पाए हैं। ऐसे किसान दोबारा गन्ना समिति मैगलगंज में जाकर घोषणा पत्र जमा कर दें, तो उनके सट्टे चालू कर दिए जाएंगे। संवाद