लखीमपुर खीरी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत मितौली तहसील क्षेत्र के काफी किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। पोर्टल पर तहसील क्षेत्र में सिर्फ एक राजस्व गांव अतरौली दिख रहा है, जिसमें कुल 8167 पंजीकृत किसान है। इसमें 8123 पात्र और 44 अपात्र किसान हैं, लेकिन इनका भी स्टेट्स पीएम किसान पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है। इसके अलावा मितौली तहसील के अन्य राजस्व गांवों के नाम पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। वहीं जिन किसानों के नाम पोर्टल पर हैं, तो वह भी दूसरी तहसीलों के गांवों में प्रदर्शित हो रहे हैं। इससे काफी किसान अब भी सम्मान निधि का लाभ पाने से वंचित हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद सूची में संशोधन नहीं हो पा रहा है।
जनपद की सात तहसीलों में से मितौली तहसील करीब पांच साल पहले अस्तित्व में आई थी, जिससे पहले यह यह एरिया मोहम्मदी तहसील का हिस्सा था। नई तहसील होने के कारण और जल्दबाजी में फीडिंग के चलते कई तरह की गड़बड़ियां हुईं। मितौली तहसील में करीब 250 राजस्व गांव हैं, लेकिन पीएम किसान पोर्टल पर सिर्फ एक राजस्व गांव अतरौली ही प्रदर्शित हो रहा है। तहसील मुख्यालय मितौली के किसानों का पता भी मितौली में नहीं है, बल्कि लखीमपुर तहसील के गांव रेहुआ में प्रदर्शित हो रहा है। ऐसे ही अन्य राजस्व गांवों के किसानों का स्टेट्स दूसरी तहसीलों में प्रदर्शित हो रहा है। इससे काफी किसान अब भी सम्मान निधि का लाभ प्राप्त नहीं कर पाए हैं। संशोधन के लिए भी करीब एक साल से कवायद चल रही है, लेकिन अब तक किसानों के नाम-पता की सही मैपिंग नहीं हो पाई है। इसी तहसील के गांव मूड़ा हरदासपुर के सैकड़ों किसानों को अब तक सम्मान निधि नहीं मिल पाई है, जबकि किसान कई बार शिकायतें करके थक चुके हैं। अधिकारी और लेखपाल सहीं जवाब नहीं दे रहे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि नई तहसील होने के चलते मितौली तहसील के राजस्व गांवों के नाम पीएम किसान पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं, बल्कि किसानों के नाम मोहम्मदी और लखीमपुर तहसील क्षेत्र के राजस्व गांवों में जुड़ गए हैं। इसके अलावा जल्दबाजी में डाटा फीड करते समय गलतियां हुई और गांव के कोड पर ध्यान नहीं दिया, जिससे किसानों के नाम दूसरी तहसील के गांवों में जुड़ गए हैं।
पीएम किसान निधि की पांच किस्तें किसानों के खाते में भेजी जा चुकी हैं। मितौली तहसील का सिर्फ एक गांव अतरौली ही पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहा है। शेष गांवों के नाम पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं। पारदर्शी पोर्टल पर भी सिर्फ एक गांव का नाम प्रदर्शित हो रहा है। इससे कई पात्र किसान लाभ पाने से वंचित हैं। समस्या के समाधान के लिए संयुक्त कृषि निदेशक (सांख्यिकी) कृषि भवन लखनऊ को पत्र भेजा है।
-राम शिष्ट, उप कृषि निदेशक
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कई बार जमा किए कागज, फिर भी नहीं मिली सम्मान निधि
गोला गोकर्णनाथ। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना किसान सम्मान निधि अधिकारियों की लापरवाही से भ्रष्टाचार का शिकार हो रही है। किसानों को आवेदन करने, भू अभिलेख, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छाया प्रति जमा कर ऑनलाइन कराने के बाद भी गोला तहसील क्षेत्र के हजारों किसान वंचित हैं, जो अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इससे पात्र किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं किसानों का कहना है कि लेखपाल और दलालों की मिलीभगत से भूमिहीन लोगों को भी किसान सम्मान निधि दी जा रही है।
ममरी। तहसील गोला क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जहां के तमाम किसानों के पते अन्य तहसील में फीड होने की वजह से उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया है, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अब तक एक भी किस्त नहीं मिल पाई है। राजकीय बीज गोदाम गोला इंचार्ज अनुपम वर्मा, मृदा परीक्षण केंद्र कंजा इंचार्ज भगवानदास वर्मा का कहना है कि तहसील गोला क्षेत्र के गांव रामपुर जंगल, कुंभी, कंजा को तहसील लखीमपुर में, ममरी को मोहम्मदी में, कोटवारा को निघासन में, बिलहरी को पलिया में, मिर्जापुर ग्रंट को तहसील धौरहरा में दर्ज कराकर तमाम किसानों को अपात्र घोषित कर दिया गया है।
संसारपुर। बोझिया के रामसनेही श्रीवास्तव, रावेंद्र कश्यप, सिसनौर की कमला देवी, रामकली, भीखमपुर के तिलकराम, झाला के परमेश्वरदीन, पसियापुर के सत्यप्रकाश, किशुनपुर के अजीम, शौकत और संसारपुर के अमन जायसवाल को भी काफी प्रयासों से किसान सम्मान निधि नहीं मिली है।
अमीरनगर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की पहली किस्त के लिए अब भी तमाम किसान तरस रहे हैं। ग्राम पंचायत बस्तौली के लालबहादुर, मलखान, चंद्रप्रकाश, जुगलकिशोर, रामबहादुर आदि का कहना है कि ऑनलाइन कराने के बाद कई बार लेखपाल से लेकर तहसील के चक्कर लगाए फिर भी किस्त का भुगतान नहीं मिला।
सारे कागजात तहसील में जमा करने के बाद भी जब उन्हें कोई किस्त नहीं मिली तो उन्होंने पता लगवाया तो तहसील से जानकारी दी गई कि दोबारा ऑनलाइन कराना पड़ेगा। दोबारा ऑनलाइन करवाने के बाद भी अब तक एक भी किस्त नहीं मिली है। यही हाल गांव के प्रेमकुमार का भी है।
-शशि देवी पत्नी स्वर्गीय कृष्ण कुमार दीक्षित शेरपुर
तीन बार ऑनलाइन और तहसील में कागज जमा करने के बाद भी उसे किसान सम्मान निधि नहीं मिली है। तहसील गोला में एक लिपिक किसानों को सम्मान निधि दिलाने के नाम पर खुली रिश्वत ले रहा है।
-रमेश कुमार निवासी ममरी
किसान सम्मान निधि की एक भी किस्त उन्हें नहीं मिल पाई है। ब्लॉक मुख्यालय बांकेगंज पर कई बार चक्कर लगाकर हार चुके हैं। अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन किसान सम्मान निधि नहीं मिली।
-वेदप्रकाश निवासी दुर्जनपुर
कई बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए कागजों को ऑनलाइन कराने के बाद लेखपाल से लेकर तहसील तक चक्कर लगाए फिर भी एक किस्त तक का भुगतान नहीं मिला।
-आशिक अली निवासी बस्तौली
इन्हें भी नहीं मिली किसान सम्मान निधि
मोहम्मदी। क्षेत्र के गांव खजुहा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसान श्यामू और आशाराम को अब तक कोई किस्त सरकार से प्राप्त नहीं हुई। कई बार लेखपाल, कृषि अधिकारी, मोहम्मदी को खसरा खतौनी और बैंक की पासबुक दी। उसके बाद भी किस्त नहीं मिल सकी। गांव केहुआ के राजकुमार सिंह ने दो साल में डीएम को कई बार प्रार्थना पत्र दिए और सामने पेश भी हुआ पर मायूसी ही हाथ लगी। संवाद