चकमार्ग पर टिन शेड डालकर रह रहे कटान पीड़ित। संवाद
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। रैनी गांव के बाढ़ पीड़ित मुफलिसी की जिंदगी जीने को विवश हैं। हर तरह से संपन्न रैनी गांव के 72 घर नदी में समा चुके हैं और शेष 12 घर भी कटान की जद में हैं। यहां के किसानों की सैकड़ों बीघा खेत में खड़ी गन्ने और धान की फसल भी नदी की धारा में बह गई है। मदद मिलने की जगह बाढ़ पीड़ितों को सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। जिसका नतीजा यह है कि गांव में जिन किसानों के दो मंजिला मकान थे आज वह दाने-दाने को मोहताज हैं और बंधे पर सड़क किनारे टिनशेड और छोटा सा छप्पर डालकर जिंदगी गुजारने पर विवश हैं।
बता दें कि अब तक इन परिवारों को सरकारी मदद के नाम पर एक बार राशन किट जरूर दी गई, इसके बाद सिर्फ आश्वासन से ही काम चलाया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को इस बात का मलाल है कि कोई जनप्रतिनिधि इस संकट की घड़ी में इनका हाल लेने नहीं आया।
सूबे के राज्यमंत्री भी आश्वासन देकर चले गए
रैनी गांव में जब पहली बार दो घर नदी में कटे तो डीएम शैलेंद्र सिंह ने गांव पहुंचकर बाढ़ खंड के अफसरों को हर हाल में गांव कटान से बचाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सूबे के जलशक्ति राज्य मंत्री ने भी दौरा कर किया और आश्वासन देकर चले गए। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि भू कटान तो कम हो गया लेकिन गांव वाले तबाह हो गए।
सभी कटान पीड़ितों को मिलने वाला गृह अनुदान डीएम की स्वीकृति मिलने के बाद उनके खाते में भेजा जा रहा है जो पक्का मकान कटा है उसका मुआवजा 95100 रुपये दिया जाएगा। मुख्यमंत्री आवास के लिए प्रस्ताव भी जा चुका है।
- एस सुधाकरन, एसडीएम धौरहरा