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बाढ़ से बचाव को खर्च किए 36.10 करोड़..हालात जस के तस

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लखीमपुर खीरी के रैनी गांव में नदी की जद में आने पर स्वयं अपने आशियाने तोड़ते ग्रामीण। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिले की तहसील पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर क्षेत्र में बारिश सीजन में हर साल नदियों से होने वाले बाढ़ से तबाही मचती है, लेकिन इसे रोकने का अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। हर साल कटान की रोकथाम के नाम पर करोड़ों की परियोजनाएं बनाकर काम कराया जाता है, लेकिन यह भी कटान की भेंट चढ़ जाती हैं। अधिकारियों ने इस वर्ष भी बाढ़ से होने वाले कटान को रोकने के लिए पांच परियोजनाओं पर 36.10 करोड़ रुपये खर्च कर डाले लेकिन हालात जस के तस बने हैं।
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बाढ़ राहत परियोजनाओं के तहत नदी के किनारों और बांध को कटान से बचाने के लिए ईसी (सीमेंट की खाली बोरी) और जीईओ (पेट्रोलियम पदार्थ और टेक्सटाइल से बना बैग) में मिट्टी/बालू भरकर सुरक्षा कवच बनाया जाता हैै। बाढ़ का प्रमुख कारण नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में होने वाली अधिक वर्षा है, जिससे नेपाल से निकलने वाली प्रमुख नदियां शारदा, घाघरा, सुहेली, मोहाना, कौड़ियाला मैदानी क्षेत्रों में तेज गति से प्रवाहित होती हैं। इन नदियों में सिल्ट लोड अधिक होने के कारण मुख्यत: शारदा और घाघरा नदियां कटान करती हुई आगे बढ़ती हैं। अधिशासी अभियंता (बाढ़ खंड) राजीव कुमार के मुताबिक इस वर्ष बाढ़ के नियंत्रण के लिए जिले में पांच बड़ी कटान निरोधक परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। बाढ़ खंड शारदानगर में शारदा नदी के बाएं किनारे पर, तहसील धौरहरा में शारदानगर से ऐरा पुल तटबंध की सुरक्षा के लिए किमी 12.150 से किमी 13.600 तक काम कराया गया है। ऐसे ही ग्राम समूह राजापुर भज्जा एवं पसियनपुरवा, तहसील सदर में शारदा नदी के दाएं किनारे स्थित ग्राम रेहरिया खुर्द, रेहरिया कला और नौवापुर, तहसील पलिया में ग्राम समूह ढकिया खुर्द, ढकिया कला, शाहपुर और तहसील निघासन में घाघरा नदी के दाहिने किनारे पर ग्राम समूह मोटेबाबा, गोदियाना, रामनगर एवं बगहा को बचाने काम कराया गया है, जिस पर 36.10 करोड़ रुपये लागत आई है। इसके बावजूद सुरक्षा कवच को भेदते हुए नदी ने मोटेबाबा, गोदियाना, रामनगर और बगहा में कटान शुरू कर दिया है। इसी तरह तिकुनिया क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदी के वेग से सुरक्षा इंतजाम विफल हो रहे हैं।
शारदा नदी के कटान में समाए और 10 घर
रैनी गांव में निरंतर कटान कर रही शारदा नदी ने शनिवार की रात से रविवार तक 10 और घर अपने आगोश में समेट लिए हैं। इन घरों के कटते ही इस गांव में घरों के कटने का आंकड़ा 54 हो गया है। वहीं 30 घर और नदी की जद में आ गए हैं, जो कभी भी नदी की तेज लहरों में समा सकते हैं। प्रशासन ने अभी तक केवल 27 परिवारों को गृह अनुदान की सहायता दिए जाने की बात कही है।
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शारदा और घाघरा नदियों की विनाश लीला जारी है। नदी की जद में आए कपिल वर्मा, बीरेंद्र वर्मा, जगदंबा प्रसाद, घनश्याम वर्मा, अवनीश कुमार, अमित वर्मा, राधेश्याम गुप्ता, आशाराम, राजकिशोर और रामादल गुप्ता के घर नदी में समा गए हैं। नदी की जद में 30 और घर आ चुके हैं, जो कभी भी नदी की तेज लहरों में विलीन हो सकते हैं। बाढ़ खंड विभाग ने यहां धेले का बचाव कार्य नहीं किया है। बाढ़ पीड़ित अमित वर्मा, जगदंबा प्रसाद, अवनीश कुमार वर्मा बताते हैं यदि समय रहते बाढ़ खंड विभाग बचाव कार्य शुरू करता, तो हम सभी ग्राम वासियों के घर बच सकते थे पर ऐसा नहीं किया गया। वहीं घाघरा नदी रामनगर, बगहा, गोड़ियनपुरवा, घोसियाना, गुलरिया तालुके अमेठी, संतरामपुरवा, बाछेपारा, हौकना मटेरा, पोखरा में भू-कटान कर किसानों की फसलों सहित जमीनों को निगल रही है। दूसरी ओर वन विभाग की भूमि और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा रही है। इसके अलावा ईसानगर क्षेत्र के संतरामपुरवा, कैरातीपुरवा, चकदहा, जंगलमटेरा, मिलिक गौडी, ओझापुरवा, बंशीबेली बनटुकरा, गनापुर, धुंधापडां सहित करीब 50 गांवों में पानी भरा हुआ है।
बाढ़ राहत केंद्र पर प्रतिदिन बाढ़ पीड़ितों को राशन किट दी जा रही है। वहीं रैनी गांव में जिनके घर कट चुके हैं, उन्हें गृह अनुदान दिया जा रहा है। 27 लोग इसका लाभ भी पा चुके हैं, जो शेष है उनकी रिपोर्ट भी भेजी गई है जल्द उन्हें भी गृह अनुदान और मुख्यमंत्री आवास दिए जाएंगे। राशन किट सभी पीड़ितों को दी जा रही है।
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- एस सुधाकरन, एसडीएम, धौरहरा

लखीमपुर खीरी के रैनी गांव में कटान करती शारदा नदी। संवाद- फोटो : LAKHIMPUR

 

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