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रैनी गांव के छह घर और नदी में समाए

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नदी में समाए घर - फोटो : LAKHIMPUR
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धौरहरा। प्रदेश के दो मंत्री बाढ़ कटान की समीक्षा और बैठक करके चले गए, जिसके साथ ही शायद अधिकारियों में सरकार का भय भी चला गया है। तभी तो रैनी गांव के लोगों को बाढ़ खंड विभाग ने रामभरोसे छोड़ दिया है। धीरे-धीरे शारदा नदी इस गांव का वजूद मिटाती जा रही है। रविवार की रात को छह और घर नदी में समा गए हैं। अब तक इस गांव के 35 लोग बेघर हो चुके हैं। गांव जाने आने के सभी संपर्क मार्ग कट चुके हैं, लेकिन गांव को बचाने के लिए प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। अब यहां के लोगों में भय और निराशा का माहौल बना है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो मंत्री आठ अगस्त को शारदानगर बैराज पहुंचे थे, जिससे लोगों को उम्मीद बंधी थी कि शायद बाढ़ कटान पीड़ितों के लिए कुछ अच्छा होगा। पिछड़ा कल्याण राज्य मंत्री अनिल राजभर ने प्रशासन की तैयार स्क्रिप्ट के अनुसार ही बचाव कार्य की उपलब्धियों को गिनाया और कुछ बाढ़ पीड़ितों को राहत किट बांटकर चले गए थे। उनके जाते ही प्रशासन बेखौफ हो गया। नतीजतन तहसील क्षेत्र के घाघरा और शारदा नदी से प्रभावित गांव अब राम के भरोसे हो गए हैं। घाघरा नदी ने जहां ईसानगर क्षेत्र के ओझापुरवा, बनटुकरा, संतरामपुरवा, कैरातीपुरवा, चकदहा, जंगलमटेरा, मिलिक गौड़ी सहित करीब इनके 30 मजरों में तबाही मचा दी है। तो वहीं शारदा नदी ने सर्वाधिक नुकसान रैनी गांव का किया है। रविवार की रात शारदा नदी ने गांव के रामनरेश वर्मा, बनवारीलाल, ओमप्रकाश, विजय प्रकाश, पहाड़ी लाल, रमेश वर्मा समेत छह लोगों के घर नदी में समा गए। इस नदी ने 15 दिनों में 35 घरों को उजाड़ दिया है। गांव का वजूद मिटाने के लिए निरंतर कटान करती चली आ रही है। नदी ने इस गांव को आने-जाने वाले सभी संपर्क मार्ग काट कर अवरुद्ध कर दिए हैं। बाढ़ खंड विभाग ने अभी तक यहां बचाव कार्य शुरू नहीं किया है। गांव के कटान पीडित रामलखन, बनवारी, सोनू, अवधेश यादव, दिनेश कुमार, उमाशंकर, लक्ष्मी नारायण, विजय प्रकाश, हरिकिशन का कहना है कि यदि प्रशासन चाहता तो हमारे घर बच सकते थे। हमारे घरों को बचाने के लिए कोई बचाव कार्य नहीं किया गया। जब डीएम आए थे, तभी कुछ लोगों को राहत किट बांटी गई थी। इसके बाद कोई मदद नहीं मिली है और न ही गृह अनुदान दिया गया है।
रैनी गांव में अब तक नहीं पहुंचा कोई जनप्रतिनिधि
जनता के दुख-दर्द बांटने का दंभ भरने वाले जनप्रतिनिधियों को भी इस गांव की याद नहीं आई है। लोगों के खेत-खलिहान के साथ घर भी नदी में समा रहे हैं। कटान पीड़ित ओमप्रकाश, रमेश वर्मा, बनवारी लाल बताते हैं कि चुनाव में वोट लेने के समय नेता दुख-दर्द बांटने और हर संभव मदद का आश्वासन देते हैं, लेकिन जब हम मुसीबत में हैं, तो कोई नेता झांकने तक नहीं आया।
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रैनी गांव में घरों के कटने की सूचना मिली है। हम बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों से बात कर चुके हैं। जल्द ही काम शुरू होगा और जिनके घर कट चुके हैं। उन्हें मुआवजा भी मिलेगा। जल्द ही गांव का दौरा करूंगा।
- बाला प्रसाद अवस्थी, विधायक
जिन लोगों के घर नदी में कट चुके हैं, लेखपाल सर्वे कर रिपोर्ट दर्ज करा रहे हैं। इन सभी पीड़ितों को अहेतुक राशि दी जाएगी। राहत किट सभी कटान पीड़ितों को दी जा रही है। बचाव कार्य नदी का जल स्तर कम होने पर ही शुरू होना संभव है।
- एस सुधाकरन, एसडीएम, धौरहरा
भाजपा नेता ने बाढ़-कटान पीड़ितों को बांटी राशन किट
तिकुनिया भाजपा नेता आशीष मिश्रा उर्फ मोनू ने गांव गंगानगर, रामनगर में मोहाना नदी से आई बाढ़-कटान पीड़ितों का हाल जानने के साथ ही नुकसान का जायजा लिया है। गंगानगर प्राथमिक विद्यालय में 254 बाढ़ पीड़ितों को राशन किट का वितरण किया। इसके बाद गंगानगर में कटान पीड़ित गुरमीत कौर, करमजीत सिंह के घर को काट रही मोहाना नदी को देखा। उन्होंने कहा मोहाना नदी की कटान को रोकने के लिए जी-ट्यूब लगवा कर कटान को रोका जाएगा। इस दौरान एसडीएम ओपी गुप्ता, तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पांडे, कानून गो अनिल कुमार शुक्ला, प्रधान मलूक सिंह मौजूद रहे
सोने का घोड़ा चढ़ाकर 36 साल बाद पूरी की मन्नत
गांव इंद्रनगर में मोहाना नदी के स्थान छोड़ने को लेकर एक सिख परिवार द्वारा अपने पूर्वजों की मानी गई मन्नत को 36 वर्षों बाद उनके परपोतों ने गंगा माता को सोने का घोड़ा चढ़ाकर पूर्ण किया है। राजवीर सिंह, सतेंदर सिंह, संदीप सिंह एवं सतबीर सिंह ने नदी के किनारे अरदास करवाकर ग्रामवासियों के साथ कड़ाह प्रसाद की देग बनाई। मोहाना नदी को सोने का घोड़ा भेंट किया। राजवीर सिंह ने बताया कि 1982 में उनके दादा स्वर्गीय वीर सिंह ने मोहाना नदी में मन्नत मांगी थी कि नदी क्षेत्र छोड़कर चली जाए और फसलों का नुकसान और जमीन का कटान न करें। उस समय नदी गांव को छोड़कर चली गई थी। परिजनों द्वारा वाहे गुरु की अरदास में घर वालों में अजयवीर सिंह विर्क, अमरीक कौर, वरींदर कौर, गुरजोत सिंह, हरजोत सिंह, सुखविंदर कौर मौजूद रहीं।
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