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बाढ़ की मार... 2583 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान

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लखीमपुर खीरी। तराई क्षेत्र की पलिया, निघासन, धौरहरा तहसीलों में बाढ़ का प्रकोप जारी है, जिससे अब तक फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 22 हेक्टेयर कृषि जमीन भी नदी में समा गई है। 53 ग्राम पंचायतों के 16,544 लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है। गांवों में पानी भरा होने के साथ ही 2583 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें डूब गई हैं।
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शारदा और घाघरा नदियों से आई बाढ़ का डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने जायजा लिया है। उन्होंने बताया है कि जनपद में एक जून 2020 से एक अगस्त 2020 तक 518.70 मिमी बारिश हुई है। शारदा बैराज पर खतरे का जलस्तर 135.40 अभी बना हुआ है। घाघरा नदी के गिरिजा बैराज पर जलस्तर खतरे के निशान से एक मिमी नीचे हैै। बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है, जिसमें अभी तक 67500 लाख रुपये का अनुमान जताया जा रहा है। डीएम ने बताया कि 40 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। 63 नावों और चार मोटर बोट की मदद से लोगों तक सहायता पहुुंचाई जा रही है। बाढ़-कटान प्रभावित किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजकर आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
पानी में छपाक की आवाज सुनते ही सिहर जाते हैं लोग
ईसानगर घुटनों तक लबालब घर में भरा पानी, काली रात का सन्नाटा और तभी पानी मे छपाक की आवाज सुनकर बाढ़ पीड़ित डर से सिहर उठते हैं। यह हाल है बाढ़ प्रभावित दर्जनों गांवों का इन गांवों की जिंदगी बे-पटरी हो गई है।
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ईसानगर ब्लॉक की चार ग्राम सभाओं के दर्जनों गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हजारों लोगों की जिंदगी तबाह हो गई है। रात के सन्नाटे में जानवरों की डरावनी आवाज, सांप, बिच्छू के खौफ के साये में लोग जी रहे हैं। उन्हें हर पल लगता है कि मौत उनके करीब है, वे सुबह होने का इंतजार करते हैं। गांव वालों का कहना है कि नाव पर्याप्त मात्रा में न होने से कई गांव के लोग पानी में घुसकर अपने गंतव्य को आने जाने के लिए विवश हैं। ग्रामीणों तीरथराम, विजय यादव, साहू चौहान, बाला प्रसाद चौहान आदि का कहना है कि घरों में पानी भरा है। नाव के सहारे घरों से सामान निकालकर ऊंचे स्थलों पर शरण ले रहे हैं। बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश कर जाने से कई लोगों के कच्चे मकान धराशाई हो गए हैं, जिससे उनके सामने रात में ठहरने की भी समस्या उत्पन्न हो गई। उन इलाकों में स्थित खेतों में लगी फसलों को भी नुकसान हुआ है। साथ ही मवेशियों को चारा की किल्लत हो गई है। चारा के लिए जान जोखिम में डाल नाव के सहारे नदी पार कर जाना पड़ रहा है। इन सारी समस्याओं से दो चार हो रहे लोग प्रशासनिक उपेक्षा के कारण काफी खिन्न हैं। लोगों का कहना है घर बार डूब गया है। खेती भी चौपट हो गई है। कोरोना की वजह से रोजी रोजगार भी छिन गया है। प्रशासन से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है।
कई गांवों के संपर्क मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी
निघासन शारदा नदी में आई बाढ़ से कई गांवों के संपर्क मार्ग पर पानी भर गया है। पानी भरने से लोगों को आवागमन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
शारदा नदी से निकले बहतिया नाले ने नदी का रूप धारण कर लिया है। बहतिया नाले में बाढ़ का पानी अधिक होने के कारण मिठुई, मटहिया, शंकरी गौढी, प्रतापगढ़ आदि गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। मिठुई और मटहिया गांव में जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव के लोग यदि बैलहा से होकर जाते हैं तो उनको करीब 10 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। खमरिया के कई घरों में बाढ़ का पानी भर गया था। नदी का जलस्तर कम होने से घरों में भरा पानी भी कम हुआ है। बैलहा जाने के लिए बने रपटा पुल भी उफान पर है।
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