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बाढ़ ने दिखाए तेवर, एनडीआरएफ की टीम बुलाई

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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। लगातार हो रही बारिश का असर शारदा नदी में दिख रहा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं पहुंच रहा है। जल आयोग के राकेश कुमार ने बताया कि शनिवार को नदी तीन बजे खतरे के निशान 154.100 सेमी से 46 सेमी ऊपर 154.560 सेमी पर बह रही थी। हालांकि शुक्रवार की तुलना में नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई तो वर्षा भी सुबह आठ बजे तक 76 मिमी रिकार्ड की गई। अब भी कई गांवों को जाने वाले रास्तों पर जलभराव है। इधर बाढ़ और कटान की विभीषिका से जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाया है। संभावना है कि एक-दो दिन में टीम आ जाएगी। इससे गंभीर हालात वाले इलाकों में बाढ़-पीड़ितों की मदद में तेजी आएगी।
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इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर चार फुट तक पानी रपटा पुल पर चल रहा है। जिसपर इसमें आवागमन का सहारा केवल नाव ही रह गया है। ठोकर नंबर एक बोझवा के पास भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल आने वाली बाढ़ के बाद भी प्रशासन कोई कारगर उपाय नहीं करता है। इस बार भी अब तक प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली है। उधर दूसरी तरफ सुहेली नदी भी अब नरम पड़ने लगी है लेकिन अब भी सठियाना रेंज के अलावा निषादनगर घोला में सुहेली नदी का पानी भरा हुआ है। चंबरबोझ के रपटा पुल पर भी पानी चल रहा है। शनिवार को बनबसा बैराज से पानी नहीं छोड़ा गया।
मझगईं। इलाके के गांव बल्लीपुर, नौगवां, बबौरा, बेला, चौरी, विश्नुपुर गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। खालेपुरवा से कुंवरपुर गांव तक जाने वाले मार्ग पर बने रपटा पुल पर भी पानी चलने लगा है। विश्नूपुर से खालेपुरवा जाने वाले रास्ते पर शारदा नदी की बाढ़ का काफी पानी चल रहा है। खेतों में खड़ी फसलें डूब गईं हैं। नयापुरवा गांव के ओमप्रकाश, राजकुमार, परसराम, बाबूराम, छंगा, सियाराम, शारदा समेत लगभग दो दर्जन ग्रामीणों में घरों में बाढ़ का पानी भर गया है। नदी किनारे बसा यह गांव टापू बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन चार दिन से गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं लेकिन प्रशासन ने अब तक उनकी कोई खबर नहीं ली है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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उफनाई घाघरा से कई गांव बाढ़ के पानी से घिरे
ईसानगर शुक्रवार की रात से घाघरा नदी का जलस्तर कुछ घटा है लेकिन बाढ़ पीड़ितों को कोई राहत नहीं मिली है, क्योंकि बाढ़ का पानी अब भी गांवों व मजरों में पहले की तरह भरा हुआ है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा ने ईसानगर ब्लॉक के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ का पानी तटीय इलाकों में भी अब तक भरा हुआ है। बाढ़ की वजह से चार ग्राम सभाओं चकदहा, ओझापुरवा, बेलागड़ी, कैरातीपुरवा में अब भी घुटने से लेकर कमर तक पानी भरा हैं। जिस कारण यहां रहने वाले लोगों की दिक्कत कम होने का नाम नहीं ले रहीं।
चारपाई पर बन रहा है खाना, नावों और मचानों पे कट रही है रात
बाढ़ के पानी ने इस कदर गांवों में तबाही मचाई है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घरों में खाना बनाने तक कि जगह नहीं है। घुटनों तक भरा बाढ़ के पानी की वजह से चारपाई व तख्त पर महिलाएं खाना बना रही हैं। सोने के लिए नावों व मचानों का उपयोग करना पड़ रहा है।
ओझापुरवा में नहीं पहुंच पाई सरकारी मदद
धौरहरा-ईसानगर क्षेत्र के ग्राम ओझापुरवा में घाघरा नदी में आई बाढ़ से गांव में करीब 60 घरों के अलावा पड़ोस में बने प्राथमिक स्कूल में पानी बहने से पूरा गांव टापू बन गया है। जहां सरकारी मदद न पहुंच पाने से लोग सुरक्षित जगह पर अब तक नहीं पहुंच पाए है। पानी की वजह से जिनके पक्के घर बने थे वह छतों पर अपना बसेरा बनाकर किसी तरह जीवन यापन करने को विवश हैं तो कच्चे घरों में रह रहे लोग पानी में ही चारपाइयों पर बैठकर अपना समय बिताने को मजबूर हैं। ग्रामीण राकेश यादव ने बताया कि अब तक किसी प्रकार की कोई सरकारी मदद न मिलने से यहां के हालात खराब होने लगे है।
जोखिम से कम नहीं है रफ्ता पुलिया कटान
तिकुनियां गुरुद्वारा कौड़ियाला मार्ग पर बाढ़ के चलते कट गई रबता पुलिया की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है इस बाबत एसडीएम ओपी गुप्ता ने बताया सड़क पुलिया के निकट काफी कट गई है जिसके चलते खतरा पैदा हो गया है। सड़क जल्दी ही बनवाई जाएगी इसके लिए विभागीय अधिकारियों से बातचीत की जा रही है।
मोहाना नदी ने मचाई तबाही फिर कटने लगे किसानों के घर
तिकुनियां सीमा क्षेत्र में बह रही मोहाना नदी का कहर जारी है। नदी का जलस्तर कम हो रहा है लेकिन कटान तेज हो गया है। लोग अपने घरों को स्वयं तोड़ रहे हैं। ग्राम इंद्र नगर निवासी मोहन सिंह, तारा सिंह, काला सिंह, बिंदर सिंह, लखविंदर सिंह, रेशम सिंह, जसवीर सिंह ने बताया कि उनके घर कटान के जद में हैं। नदी घरों से करीब पांच मीटर दूर रह गई।
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