लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण के बीच बारिश में होने वाली संक्रामक बीमारियों का मौसम भी शुरू हो गया है। इससे बचने के लिए मंडलायुक्त ने बैठक में शहर से लेकर गांव की सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा है। गांव की सफाई कितनी बेहतर होगी इसका अंदाजा शहर यानी जिला मुख्यालय के नाले नालियों के हालात देखकर लगाया जा सकता है। सभासदों का कहना कि एक बार कमिश्नर साहब शहर का भ्रमण कर लेते तो जिले की स्वच्छता कितनी बेहतर है इसकी जानकारी हो जाती।
कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने कोरोना महामारी में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए भले ही साफ-सफाई को बेहतर करने के निर्देश दिए हों। मगर, जिले की सफाई की हकीकत शहर (जिला मुख्यालय) के नाले नालियों की स्थित देखकर लगाई जा सकती है। ये हालत तब हैं कि जब शहर की सफाई व्यवस्था पर पालिका प्रशासन हर साल करीब एक करोड़ रुपये खर्च करने के साथ बारिश से पहले नालों की सफाई के लिए अलग से लाखों रुपये का ठेका कराती है। इसके बावजूद नालों से लेकर नालियां सिल्ट से पटे हैं।
अधिकारी भी नहीं लेते संज्ञान
संक्रामक रोगों की रोकथाम की कवायद शुरू हो गई है। मगर, शहर की सफाई को लेकर न तो पालिका प्रशासन गंभीर है और न ही जिले के आला अधिकारी। लोगों का कहना है कि शहर से अधिकारियों का निकलना होता है। मगर, अफसोस कि उन्हें शहर की गंदगी नहीं दिखती। एक बार कमिश्नर साहब ही निरीक्षण करें तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
एक बार कमिश्नर साहब शहर का निरीक्षण कर लेते तो स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत सामने आ जाती। सफाई के मामले में पालिका इतनी सजग है कि सात दिन पहले नाले से निकाला मलबा अभी तक पड़ा है। लोग इसके बीच से होकर निकलने का मजबूर हैं।
नाले नालियों की तली झाड़ सफाई हुई ही नहीं। वार्ड में सफाई के लिए ईओ और सफाई निरीक्षक तक से कहा, लेकिन दोनों ने अनसुना कर दिया। एक बार कमिश्नर साहब मोहल्लों का भ्रमण कर लें। सफाई के मामले में पालिका कितनी सजग है इसकी जानकारी हो जाएगी।
- शारिब खान, सभासद नई बस्ती