लखीमपुर खीरी। बारिश में संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने एवं इससे बचाव के लिए जिला प्रशासन सुरक्षा कवच बनाने में जुट गया है। बाढ़ राहत परियोजनाओं के तहत नदी के किनारों और बंधा को कटान से बचाने के लिए पीपी बैग में मिट्टी भरकर सुरक्षा कवच बनाया जा रहा हैै। इससे गांवों के श्रमिकों को रोजगार मुहैया हुआ है, वहीं बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए परियोजनाएं मील का पत्थर साबित होंगी।
डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि हर साल बाढ़ के नियंत्रण के लिए जिले में पांच बड़ी कटान निरोधक परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जो वर्तमान में प्रगति पर हैं। पांच कटान निरोधक परियोजनाएं सें हजारों की तादाद में जिले के श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार मिल रहा हैै। डीएम ने बताया कि जनपद की बाढ़ का प्रमुख कारण नेपाल राष्ट्र के पहाड़ी क्षेत्र में होने वाली अधिक वर्षा है। नेपाल राष्ट्र से निकलने वाली प्रमुख नदियां शारदा, घाघरा, सुहेली, मोहाना, कौड़ियाला आदि भारतीय सीमा के मैदानी क्षेत्रों में तीव्र वेग से प्रवाहित होती हैं। इन नदियों में सिल्ट लोड अधिक होने के कारण मुख्यत: शारदा एवं घाघरा नदियां कटान करती हुई आगे बढ़ती हैं, जिससे जनपद की तहसीलें पलिया, निघासन, धौरहरा पूर्ण रूप से और गोला एवं लखीमपुर आंशिक रूप से बाढ़ की चपेट में आती हैं। बाढ़ खंड शारदानगर में शारदा नदी के बाएं किनारे पर, तहसील धौरहरा में शारदानगर से ऐरा पुल तटबंध की सुरक्षा के लिए किमी 12.150 से किमी 13.600 तक काम कराया जा रहा है। ऐसे ही ग्राम समूह राजापुर भज्जा एवं पसियनपुरवा, तहसील सदर में शारदा नदी के दाएं किनारे स्थित ग्राम रेहरिया खुर्द, रेहरिया कला और नौवापुर, तहसील पलिया में ग्राम समूह ढकिया खुर्द, ढकिया कला व शाहपुर और तहसील निघासन में घाघरा नदी के दाहिने किनारे पर ग्राम समूह मोटेबाबा, गोदियाना, रामनगर एवं बगहा के सुरक्षार्थ कटाव निरोधक कार्यों की कुल पांच परियोजनाएं स्वीकृत हैं।