लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन के दौरान गांवों में मजदूरों को मनरेगा से रोजगार देने में जनपद ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। सीडीओ अरविंद सिंह की पहल चतुर्भुजी विकास मॉडल मनरेगा से मजदूरों को रोजगार दिलाने में मील का पत्थर साबित हुआ है, जिससे 51 हजार से अधिक मजदूरों को रोजगार मिला है। बाहर से आए मजदूरों/कामगारों को भी इससे रोजगार दिलाया जा रहा है, ताकि उन्हें परिवार के भरण पोषण में परेशानी न आए।
शासन ने 20 अप्रैल 2020 से मनरेगा के तहत काम कराने को छूट दी, जिसके बाद शुरुआत में ही 30 हजार मजदूरों को यहां काम मिला। इसके बाद जिस तरह गांवों में काम बढ़ता गया, उससे जनपद में 51,572 श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार मिलने लगा है। सीडीओ अरविंद सिंह ने बताया कि पूरे भारत में जिस दिन यानी 20 अप्रैल से काम करने की शुरुआत हुई, उसी दिन से लखीमपुर खीरी पूरे उत्तर प्रदेश की रैकिंग में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। पहले दिन पूरे प्रदेश का अकेले ही 20 प्रतिशत रोजगार इस जनपद में सृजित किया था। सीडीओ ने बताया कि खीरी पूरे प्रदेश का आठ प्रतिशत रोजगार दे रहा है, जबकि यहां दो प्रतिशत से भी कम ग्राम पंचायतें है। 51,000 से अधिक श्रमिकों को रोजगार देने वाला लखीमपुर खीरी प्रदेश का अग्रणी जनपद बन गया है।
क्या है चतुर्भुजी विकास मॉडल
सीडीओ अरविंद सिंह ने गांवों में सालों से चले आ रहे जमीनी विवादों का निपटारा कराने के साथ ही गांवों के लोगों को रोजगार दिलाने के लिए चतुर्भुजी विकास मॉडल तैयार किया है। इसकी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत परसा के दो राजस्व गांवों परसा और पटेहरा में 50 चकरोड बनाकर शुरुआत की गई, जिनकी कुल लंबाई करीब 55 किमी है। जनपद की सभी 1167 ग्राम पंचायतों में चकमार्गों के निर्माण से करीब 50 हजार मानव दिवस प्रतिदिन सृजित होंगे, जिससे करीब एक करोड़ रुपये श्रमिकों को भुगतान किया जाएगा। साथ ही मनरेगा से 40 से 50 लाख रुपये के सामग्री अंश से स्थायी परिसंपत्तियों का सृजन किया जाएगा।
संपूर्ण समाधान/थाना दिवसों में राजस्व से जुड़े विवाद खासकर चकमार्गों पर कब्जे के आते हैं। इसके कारण गांवों में आपसी रंजिश और कानून व्यवस्था की समस्या आती है। कई बार कब्जा हटवाने के बाद दोबारा कब्जा किए जाने के मामले आते हैं। इन समस्याओं का जड़ से निदान करने के लिए चतुर्भुजी विकास मॉडल बनाया है। इससे गांवों के मजदूरों को नियमित रोजगार मिलेगा और प्रत्येक गांव के मजदूरों को प्रतिदिन एक लाख रुपये तक की आमदनी होगी। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था सुधरेगी।
-अरविंद सिंह, सीडीओ