लखीमपुर खीरी। जनपद की मंडियों में इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन के चलते गेहूं की आवक कम हो गई है। पिछले साल के मुकाबले अब तक 11,769 क्विंटल गेहूं की आवक कम होने से अधिकारियों को मंडी शुल्क की चिंता सताने लगी है, क्योंकि लक्ष्य पिछले साल से कम नहीं हुआ है। पड़ोसी जनपदों सीतापुर और बहराइच से काफी संख्या में किसान गेहूं बेचने आते थे, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते यह किसान मंडियों में नहीं पहुंच पा रहे हैैं।
जनपद में कुल छह मंडी समितियां संचालित हैं, जिसमें लखीमपुर की राजापुर मंडी में पड़ोसी जनपद सीतापुर और बहराइच से काफी गेहूं आता था। जो अब लॉकडाउन के चलते बिल्कुल बंद हो गया है। लिहाजा अब पूरा दारोमदार जनपद के किसानों पर ही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गेहूं की आवक घटने लगी है। शुक्रवार (24 अप्रैल 2020) को 5454 क्विंटल गेहूं की आवक हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को 7443 क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी। इससे पहले गुरुवार को भी करीब दो हजार क्विंटल कम आवक हुई। इसी तरह मोहम्मदी मंडी में 400 क्विंटल गेहूं की आवक घट गई, जो पड़ोसी जनपद शाहजहांपुर की सीमा पर स्थित है। मंडी सचिव रामबाबू शर्मा ने बताया कि एक से 24 अप्रैल 2020 तक सभी छह मंडियों राजापुर, मैगलगंज, मोहम्मदी, गोला, पलिया, तिकुनिया में कुल 2,30,144 क्विंटल गेहूं की आवक हुई है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 11,769 क्विंटल कम है। पिछले वर्ष 24 दिनों में 2,41,913 क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी। हालात देखकर कयास लगाए जा रहे हैं कि मई में मंडियां सूनी हो जाएंगी, क्योंकि राजापुर मंडी में खुली नीलामी के चलते पड़ोसी जनपदों के काफी किसान यहां आते थे।
लॉकडाउन के चलते पड़ोसी जनपदों से गेहूं की आवक नहीं हो रही है, जिससे इस बार अप्रैल माह में आवक कम होने लगी है। इससे मंडी शुल्क के कलेक्शन पर विपरीत असर पड़ सकता है। मौसम की मार से गेहूं का उत्पादन भी कम हुआ है।
- रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव