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आरएफसी ने गेहूं क्रय केंद्रों का किया निरीक्षण, खरीद बढ़ाने के दिए निर्देश

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लखीमपुर खीरी। क्षेत्रीय खाद्य आयुक्त (आरएफसी) संतोष कुमार ने शुक्रवार को गेहूं खरीद का हाल जानने के लिए जिले का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले राजापुर मंडी में खुले क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया, जहां खरीद होती मिली। उन्होंने क्रय केंद्र प्रभारी को गेहूं खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों को समय से भुगतान कराने के लिए कहा।
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आरएफसी संतोष कुमार पूर्वाह्न करीब 11 बजे राजापुर मंडी पहुंचे, जिसके बाद केंद्र प्रभारियों और आढ़तियों में खलबली मच गई। सूचना मिलते ही जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय, एएमओ प्रमोद गुप्ता और मंडी सचिव रामबाबू शर्मा भी मौके पर पहुंच गए। आरएफसी ने सबसे पहले विपणन शाखा के क्रय केंद्र प्रथम का निरीक्षण किया, जहां पर मौजूद किसानों से उन्होंने सुविधाओं के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने केंद्र प्रभारी केके पाठक से खरीद के बारे में पूछताछ की। कम किसानों से खरीद होने पर उन्होंने खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद एफसीआई, पीसीएफ और पीसीयू के क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया, जहां पर सन्नाटा पसरा मिला। इस पर उन्होंने केंद्र प्रभारियों को किसानों से संपर्क कर गेहूं खरीदने के निर्देश दिए। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने जनपद में कुल खरीद के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 1538 किसानों से 12315 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई है। इसके बाद उन्होंने महेवागंज और गोला मंडी में स्थापित क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया।
महेवागंज में आरएफसी ने गेहूं खरीद देखी, दबी जुबान किसानों ने सुविधा शुल्क लेने की बात कही
महेवागंज किसानों से गेहूं खरीद की जमीनी हकीकत जानने के लिए शुक्रवार को क्षेत्रीय खाद्य आयुक्त संतोष कुमार दुबग्गा रोड स्थित विपणन शाखा के क्रय केंद्र पहुंचे। आरएफसी ने गेहूं खरीद का बारीकी से निरीक्षण किया। सेंटर इंचार्ज मृदुला यादव से उन्होंने पूरी जानकारी ली। अधिकारी को क्रय केंद्र के ठेकेदार की जगह उनके कारिंदे गेंहू की तौल कराते मिले। अधिकारी ने गेहूं बेचने आए किसानों से सहूलियत और दिक्कत के बारे में पूछा। केंद्र प्रभारी ने बताया कि 17 अप्रैल से अब तक 20 किसानों से 1105.5 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। दबी जुबान कुछ किसानों ने उतरवाई और छन्ना लगाने के नाम पर 50 रुपये सुविधा शुल्क लेने का आरोप लगाया। इस पर सेंटर इंचार्ज ने सफाई दी कि पंखा और छन्ना लगाने वाले पल्लेदार को कुछ किसान खुशी से 20 रुपये पारिश्रमिक दे देते हैं।
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