लखीमपुर खीरी। स्वच्छ सर्वेक्षण का दौर चल रहा है। इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी है। न नाले-नालियों की सफाई हो रही है और न ही गली-मोहल्लों की। नाले-नालियां जहां सिल्ट से पटे हैं तो वहीं गलियां गंदगी से। खाली पड़े प्लॉट डलाव घर बन गए हैं। हालांकि पालिका प्रशासन शहर को क्लीन और ग्रीन बनाने के अपने ढकोसलों पर अड़ा हुआ है। हकीकत मोहल्ले के नाले-नालियां और गलियां बयां कर रही हैं।
31 जनवरी तक स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम आकर शहर का निरीक्षण कर सकती है। टीम लोगों से भी सफाई पर सवाल करेगी, जिसके आधार पर शहर की रेटिंग तय होगी। इसके बावजूद पालिका प्रशासन नगर की साफ सफाई पर ध्यान नहीं दे रहा है। न तो नालियों की ही रोज सफाई होती है और न गलियों की। गंदगी का आलम यह है कि नालियों से निकाला गया मलबा कई-कई दिनों तक नहीं उठता। मोहल्लों से डस्टविन गायब हैं। इससे खाली प्लॉट भी डलाव घर बन गए हैं। ऐसे में सर्वेक्षण टीम ने यदि मोहल्लों का निरीक्षण किया तो पालिका के दावों की पोल खुलना तय है। इससे शहर की फजीहत होना भी तय है।
प्रचार पर लाखों खर्च, फिर भी सर्वेक्षण से लोग अंजान
पालिका प्रशासन ने नगर वासियों को स्वच्छ सर्वेक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए लाखों रुपये खर्च प्रचार प्रसार किया। लेकिन शहर के लोग स्वच्छ सर्वेक्षण में बारे जानते तक नहीं। लोगों को कहना है कि न तो सदस्यों ने ही इस बारे में कोई जानकारी दी और न नगर पालिका से ही मिली। ऐसे में शहर की सफाई का आंकलन करने आने वाली टीम को शहर के लोग सर्वेक्षण में क्या फीडबैक देगें। यह तो पालिका के लोग ही बता सकते हैँ।
बोले मोहल्लेवासी स्वच्छ सर्वेक्षण किस चिड़िया का नाम
एक साल पहले नाले की सफाई हुई थी। उसमें भी खानापूर्ति हुई थी। स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है और इसमें होगा क्या। इसके बारे में किसी ने बताया ही नहीं।
सियाराम, ईदगाह
झाड़ू रोजाना लगती है। मगर, कूड़ा लेने कोई नहीं आता। पालिका ने डस्टविन भी नहीं लगवाए और न ही किसी ने स्वच्छता सर्वेक्षण के बारे में जानकारी दी।
राजेंद्र कुमार, ईदगाह
मोहल्ले में झाड़ू तो रोज लगती है। मगर, नालियों से निकला मलबा कई दिन बाद उठता है। स्वच्छता सर्वेक्षण क्या है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
साजिद, ईदगाह
स्वच्छ सर्वेक्षण के बारे में शहरवासियों को जागरूक करने के लिए प्रचार प्रसार कराया गया। पर्चे बंटवाकर दीवारों पर पेंटिंग कराई र्गइं। पालिका कर्मियों को भी जानकारी देने में लगाया है। - आरआर अंबेश, अधिशासी अधिकारी