निघासन-गोला। गन्ना किसानों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। आलम यह है कि गन्ने की फसल तैयार होने के बाद चीनी मिल तक पहुंचाने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद गन्ना क्रय केंद्रों पर छलावा किया जा रहा है। अधिकांश क्रय केंद्रों पर घटतौली की समस्या से जूझ रहे किसानों का गुस्सा अब फूट रहा है। केंद्र पर हंगामा के बाद जब कांटे की जांच होती है तो मामला पकड़ा जाता है। अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर किसानों को समझाबुझाकर शांत कर देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि किसान को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है।
इस माह इन केंद्रों पर पकड़ी गई घटतौली
03 दिसंबर-जंगबहादुरगंज के मोहद्दीनपुर बी स्थित गन्ना क्रय केंद्र पर घटतौली के विरोध में किसानों ने किया हंगामा, जांच में कांटा में कमी पाई गई।
18 दिसंबर-गुलरिया चीनीमिल रानीगंज गन्ना क्रय केंद्र पर घटतौली पर किसानों ने किया हंगामा, जांच के बाद कांटा सही कराया गया।
20 दिसंबर- तिकुनियां के रननगर गन्ना क्रय केंद्र पर घटतौली की शिकायत कर किसानों ने किया हंगामा, कांटा ठीक कराया गया।
किसान ऐसे पकड़ता है घटतौली
किसान गन्ने से भरा हुआ वाहन क्रय केंद्र पर ले जाने के पहले धर्मकांटा करवाता है। धर्मकांटा करवाने के बाद वह क्रय केंद्र पर ले जाता है। वहां पर धर्मकांटे कराने की बात बिना बताए गन्ने की तौल करवाता है। जब उसमें गन्ना कम निकलता है तो वह मामले की शिकायत कर धर्मकांटे की पर्ची दिखाता है। यदि तौल लिपिक को पहले से पता चल जाता है कि किसान ने धर्मकांटा करवाया है तो वह धर्मकांटे की पर्ची लेकर उसी अनुसार गन्ना तौल देता है।
किसान 20 से 50 किलो स्वेच्छा से देते हैं गन्ना
गन्ना क्रय केंद्रों पर किसान अपनी स्वेच्छा से डनलप में 20 किलो और ट्रॉली में 50 किलो गन्ना देता है। यह परंपरा बहुत पुरानी पड़ी हुई है। इस संबंध में किसान रघुनंदन, महेश, दिनेश आदि ने बताया कि गन्ना आदि में कमी होने के कारण या अधिक गन्नें की सफाई न होने के कारण कुछ गन्ना तौल लिपिक को दिया जाता है।
क्या कहते हैं किसान
लिपिक पर हो रासुका की कार्रवाई
किसान खेतों में एक-एक गन्नें की देखरेख करता है। उसके बाद घटतौली की जाती है। यह बेहद गलत बात है। किसी भी किसान को एक ग्राम गन्ना लिपिक को नहीं देना चाहिए। यदि किसान परंपरा डाली है तो गलत है। घटतौली करने वाले लिपिक का लाइसेंस रद्द कर उन पर रसुका की कार्रवाई करनी चाहिए।
- विनोद वर्मा, संचालक सरयू सहकारी चीनी मिल बेलरायां
भाजपा सरकार किसानों की ओर दे ध्यान
किसानों की गाढ़ी कमाई को लूटना बेहद गलत है। यदि कोई लिपिक घटतौली करता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ लामबंद होना चाहिए। साथ ही में यदि वह अपना दोषा रोपण कांटा सही करने वाले टैक्नीशियन पर मढ़ता है तो संबंधित उच्चाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। भाजपा सरकार को किसानों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- अमित सिंह, गन्ना किसान लुधौरी
भुगतान न मिलने और घटतौली की दोहरी मार झेल रहे किसान
गोला गोकर्णनाथ। गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों से अवैध रूप से गन्ने की उतराई की रकम प्रति ट्रॉली 150 रुपये और प्रति डनलप 50 रुपये वसूल की जा रही है, अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। पिछले वर्ष का भी गन्ना भुगतान किसानों को नहीं मिला, वहीं गन्ना क्रय केंद्रों पर प्रति ट्रॉली पांच क्विंटल और प्रति बैलगाड़ी दो कुंटल घटतौली की जा रही है। जिससे किसान दोहरी मार झेल रहा है।
कांटे की बाहरी अधिकारियों से क्रॉस चेकिंग हो
गन्ना सेंटरों पर किसानों का गन्ना वजन से अधिक तौल देना आम बात हो गई है। हैरत की बात तो यह है कि कांटा चेक करने की सूचना पहले से ही पहुंच जाती हैं और कांटा ठीक हो जाता है। चीनी मिलो में भी गेट पर अपने मास्टर कंप्यूटर के सिस्टम के तहत रात को किसानों का गन्ना अधिक तौल लेते हैं। कांटो की बाहरी अधिकारियों द्वारा क्रास चेकिंग होना चाहिए और गन्ना चोरी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ लाइसेंस जप्त कर सख्त कार्रवाई हो।
- अंजनी कुमार दीक्षित ग्राम शेरपुर।
किसानों के साथ बजाज हिंदुस्थान शुगर के गन्ना क्रय केंद्र जटपुरा में 20 नवंबर को घटतौली पकड़ी थी। जिसकी सूचना सचिव नंदलाल और ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को दी। अधिकारी मौके पर पहुंचे किंतु उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। पिछले वर्ष छितौनियां ग्राम के गन्ना किसान कपिल वर्मा की ट्रॉली में घटतौली पकड़ी गई, सचिव ने मुकदमा दर्ज कराया किंतु पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। चीनी मिल के गेटों पर मैनुअल कांटा लगाने का शासनादेश है। किंतु कहीं भी मैनुअल कांटें नहीं लगाए गए हैं।
- श्रीकृष्ण वर्मा ग्राम अजान।
घटतौली की शिकायत मिलती है तो उस लिपिक और कांटा सही करने वाले टैक्निशियन के खिलाफ शख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उसका लाइसेंस रद्द करने के लिए भी लिखा जाएगा।
- ओपी गुप्ता, एसडीएम