लखीमपुर खीरी। दिल्ली में एक फैक्टरी में लगी भीषण आग से 45 लोगों की जान चली गई, अगर ऐसा हादसा लखीमपुर में हुआ तो तस्वीर दिल्ली से भी अधिक भयावह होगी। यहां के खपरैल बाजार, पटवा बाजार और सब्जी मंडी आदि बाजारों के तंगहाल गलियों में बसे होने के कारण यहां न तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी जा सकती है और न ही आग से निपटने के लिए न कोई संसाधन उपलब्ध हैं।
स्थान खपरैल बाजार
यह बाजार क्षेत्र का प्रमुख बाजार है। इस बाजार में एक हजार से अधिक दुकानें हैं। दुकानदारों के सड़क तक सामान रखने से रास्ते अब गलियां बन चुके हैं। प्रतिदिन हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे और पुरुष यहां खरीदारी करने आते हैं।
स्थान पटवा बाजार
खपरैल बाजार की तरह ही कुछ ऐसा ही हाल पटवा बाजार का भी है। यह बाजार लोहा मंडी में सजती है। वैसे बाजार के रास्ते तो काफी चौड़े हैं लेकिन दुकानें सड़क तक लगी होने से रास्ते गायब हो जाते है और दो से अधिक लोग एक साथ निकल नहीं पाते हैं।
स्थान जवाहर बाजार
जवाहर बाजार में भी सैकड़ों दुकानें हैं और यह बाजार भी काफी सकरी गलियों में स्थित है। अधिकतर दुकानों पर आग से निपटने के इंतजाम ही नहीं है। साथ ही इस बाजार में भी काफी भीड़भाड़ रहती है। यहां सुबह और शाम हालात यह हो जाते हैं कि बाजार से निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
खपरैल बाजार के पास एक अग्निशमन केंद्र है लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बाजार के अंदर नहीं पहुंच पाती है। पिछले छह सालों में साड़ी की एक दुकान में दो बार आग लग चुकी है। इसके अलावा दो साल पहले सब्जी मंडी में भी सिलिंडर फटने से आग लग गई थी। इस घटना में भी कई लोग झुलस गए थे और तब भी फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंच पाई थी।
नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वह शहर की तंग गलियों को चिह्नित करें ताकि वहां अतिक्रमण अभियान चलाकर सड़क को चौड़ा किया जा सके। इसके अलावा आपात स्थिति से निपटने के लिए भी इंतजाम किये जाएं।
-डॉ. अरुण कुमार सिंह, एसडीएम सदर