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खेतों में लोगों पर बाघ के हमलों की दास्तान हैं बहुत पुरानी

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लखीमपुर खीरी/ पलियाकलां/ गोला। सालों से बाघ जंगल से निकल कर खेतों की ओर आकर इंसानों पर हमला कर रहे हैं। इन घटनाओं में कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं और दर्जनों बुरी तरह जख्मी भी हो चुके हैं।
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वर्ष 2008 में नार्थ खीरी क्षेत्र में खेतों की ओर आए एक बाघ ने खेत में काम कर रही एक किशोरी पर हमला कर उसको मार डाला था, इसके बाद इस बाघ ने एक-एककर आठ लोगों को अपना निवाला बनाया। बाध के आतंक से नार्थ खीरी, मैलानी रेंज के कांप टांडा, कटैया, महाराज नगर आदि करीब आधा दर्जन गांव के लोग दहशत में आ गए थे। बाद में बाघ को ट्रेंक्युलाइज कर पकड़ लिया गया था। वर्ष 2016 में मैलानी रेंज के खेतिहर इलाके में आए एक बाघ ने एक-एक कर सुआबोझ निवासी वीरेंद्र, भरगवां निवासी जमुना प्रसाद, कुकरा के रईस, खेत की रखवाली कर रहे तरसेम को मौत के घाट उतार दिया था। इस बाघ को भी ट्रेंक्युलाइज कर पकड़ा गया।
इसी साल अप्रैल माह में एक बाघ ने ढाखा बांकेगंज निवासी किरन को मार डाला था। इसी माह चाचा पुरवा निवासी सुनीता भी बाघ का निवाला बनी। अप्रैल 2016 में पलिया थाना क्षेत्र के गांव बिहारीपुरवा में खेत की रखवाली कर रहे बुजुर्ग अंजनि को भी बाघ ने शिकार बनाया। बीते साल 9 जनवरी को किशनपुर सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघ ने यहां के गांव हंसनगर निवासी बुजुर्ग संतराम को मार डाला था। मोहम्मदी महेशपुर रेंज अंतर्गत सन 2017 में 13 अप्रैल को देवियापुर निवासी 40 वर्षीय शर्मादीन, 28 अगस्त को गांव पसियापुर के 52 वर्षीय नरायनलाल, 21 अक्तूबर को अशर्फीगंज के मूड़ा गांव निवासी 24 वर्षीय लालाराम, 16 नवंबर को महेशपुर निवासी 47 वर्षीय किसान ओमप्रकाश उर्फ प्रकाश और सन 2018 में 18 जून को सुंदरपुर के 35 वर्षीय किसान बालकराम की बाघ के हमले में मौत हो गई।
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इस साल सात फरवरी को बफर जोन मैलानी भरगवां रेंज काकोरी मडैया निवासी 45 वर्षीय सरोजनी को भी बाघ ने मार दिया। इसके बाद दक्षिण खीरी की मोहम्मदी रेंज के गांव रायपुर निवासी कृपाराम भी बाघ का शिकार बने। इसके अलावा बाघों के हमलों में कई किसानों के जख्मी होने की कई घटनाएं होती रहीं हैं।
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