लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद में एजेंसियों ने अचानक खरीद के आंकड़े बढ़ा दिए हैं, लेकिन राइस मिलों से एफसीआई को सीएमआर (कस्टम चावल) की डिलीवरी बेहद धीमी है। एजेंसियों को 92,762 मीट्रिक टन सीएमआर चावल की डिलीवरी एफसीआई को देना ड्यू हो चुका है, लेकिन अभी तक 21,437 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी की गई है। जबकि 71,325 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी करना शेष है। एक चौथाई से भी कम डिलीवरी होने से अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं। जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने एजेंसी प्रबंधकों को नोटिस जारी कर जल्द सीएमआर चावल की डिलीवरी एफसीआई में कराने के निर्देश दिए हैं।
खाद्य एवं रसद विभाग का दावा है कि 16,848 किसानों से 1,38,451 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है, जो लक्ष्य 1,93,000 मीट्रिक टन के सापेक्ष 81 प्रतिशत है। इसके सापेक्ष 67 प्रतिशत की दर से एफसीआई को 92762 मीट्रक टन सीएमआर चावल की आपूर्ति की जानी है, लेकिन अभी तक 21437 मीट्रिक टन सीएमआर की डिलीवरी हुई है। सीएमआर की कम आपूर्ति से अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि पिछले सालों में सीएमआर घोटाले के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई राइस मिलें सीएमआर चावल को बाजार में बेचकर गुल खिला चुकी हैं। लिहाजा सीएमआर चावल की कम डिलीवरी होने से अधिकारी चौकन्ने हो गए हैं। सीएमआर की जल्द डिलीवरी कराने के लिए जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने पीसीएफ, पीसीयू, एग्रो, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम के जिला प्रबंधकों को नोटिस दी है।
27234 किसानों का पंजीकरण, 3626 किसानों का सत्यापन अटका
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए 27234 किसानों ने पंजीकरण कराया है, जिसमें से 16848 किसानों से धान खरीदा जा चुका है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने बताया कि एसडीएम स्तर पर 3626 किसानों के नाम मिसमैच (अंतर) का सत्यापन होना है। 27790 गाटा की जांच में 8080 गाटा निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा 356 किसानों का पंजीकरण निरस्त किया गया है। उन्होंने बताया कि खाद्य एवं रसद विभाग के क्रय केंद्रों से किसानों को पीएफएमएस से भुगतान किया जा रहा है, जो पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था है। अन्य एजेंसियों को इस बार आरटीजीएस से भुगतान करने की छूट दी गई है।