लखीमपुर/खमरिया। जिले की नौ में से आठ चीनी मिलों में पेराई सत्र प्रारंभ हो चुका है, लेकिन एडवंट्ज ग्रुप की गोविंद शुगर मिल ऐरा ने अब तक पेराई प्रारंभ नहीं की है और न ही मिल चलाने की पुख्ता तिथि घोषित की गई है। इससे ऐरा गन्ना समिति समेत चार गन्ना समितियों के करीब 80 हजार किसान प्रभावित हुए हैं। गेहूं की बुवाई करने के लिए किसानों को औने-पौने दामों पर क्रेशर मालिकों के हाथ गन्ना बेचकर शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। इस मिल पर पिछले पेराई सत्र का एक अरब 41 करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है।
ऐरा चीनी मिल के अधिकारियों ने गन्ना विभाग को भेजी रिपोर्ट में कहा था कि 10 नवंबर 2019 तक मिल की रिपेयरिंग और मेेंटीनेंस का कार्य पूर्ण हो जाएगा। इसके बाद 15 नवंबर 2019 से पेराई प्रारंभ की जाएगी। इसके बाद मिल के अधिकारी तारीखें आगे बढ़ाते गए, लेकिन अब तक मिल को चालू करने की असल तारीख नहीं बता पाए हैं। इस मिल को ऐरा समिति के 68128 किसान समेत अरनीखाना, लखीमपुर समिति, सीतापुर जिले की हरगांव समिति, महमूदाबाद समिति और बहराइच जिले की नानपारा समिति के भी किसान गन्ना सप्लाई करते हैं। सूत्रों का कहना है कि मिल को छह गन्ना समितियों के करीब 80 हजार किसान गन्ना सप्लाई करते हैं। इस मिल के न चलने से किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीनी मिल न चलने से क्रेशर मालिक मौके का फायदा उठाने में जुटे हैं। किसानों से 325 रुपये वाला गन्ना 175 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। किसानों को भी मजबूरन घाटा उठाकर गन्ना बेचना पड़ रहा है।
चीनी मिल चालू नहीं होने से किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। पिछले साल का भी मिल भुगतान नहीं कर रही। क्रेशर वाले कौड़ियों के भाव गन्ना खरीद रहे हैं।
-फूलचंद यादव, किसान
नवंबर बीतने को है, लेकिन मिल चालू नहीं हुई है। कब तक चलेगी इसका भी पता नहीं चल रहा। गेहूं की बुवाई करना जरूरी है, जिसके लिए गन्ने का खेत खाली करना पड़ रहा है।
-ओमप्रकाश, किसान
ऐरा मिल ने 15 नवंबर को मिल चालू करने की तारीख दी थी। इसके बाद 10 दिन अधिक बीत गए हैं, जिसके लिए मिल के अध्यासी से जवाब मांगा है। एथनॉल का प्लांट बनने से और रोलर नहीं आने से देरी होने का कारण बताया जा रहा है। एक-दो दिन में मिल पेराई प्रारंभ कर देगी।
-ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी