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गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों का बुरा हाल

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गोला गोकर्णनाथ -अमीरनगर (लखीमपुर खीरी)। अफसरों की उदासीनता से गन्ना किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। आलम यह है कि जिले की नौ चीनी मिलों के लिए खोले गए 501 गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। आलम यह है कि अधिकतर क्रय केंद्रों पर किसानों को सर्द रात गुजारने के लिए खुले आसमान या फिर अपने वाहनों के नीचे सोना पड़ता है। वहीं अलाव जलाकर तापने के लिए किसानों को गन्ने की पत्ती साथ लानी पड़ती है। पेयजल अथवा जानवरों के चारे की व्यवस्था भी उन्हें खुद ही करनी पड़ रही है। शौचालय बंद होने से बाहर खुले में शौच को जाना पड़ता है। यार्ड में इतनी गर्द उड़ती है कि बैठकर खाना भी नहीं खा सकते। डनलप से गन्ना लाने वाले किसानों को सुविधाएं कम असुविधाओं ज्यादा मिलतीं हैं। रविवार को गन्ना क्रय केंद्र का जायजा लिया तो हकीकत देखने को मिली। पेश है आंखों देखा हाल।
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ट्रॉली के नीचे लेटकर बितानी पड़ती है रात
ग्राम पंचायत डाटपुर के ग्राम पसियापुर निवासी अवधेश कुमार ने बताया कि चीनी मिल में 12 से 14 घंटे लग जाते हैं, ऐसे में पूरी रात ट्रॉली के साथ बनाए गए अस्थायी चारपाई पर लेटकर रात गुजारनी पड़ती है, वहीं असौवा के रामनरेश ने बताया कि उनकी ट्रॉली में चारपाई नहीं बनी है, दो बोझ गन्ने की पत्ती घर से लाए, उसी को बिझाकर रात गुजारेंगे।
बिलहरी से ट्रॉली में गन्ना भरकर लाए दिलीप कुमार का कहना है कि किसान पहले से ही परेशान हैं। मिल प्रबंधन गन्ना किसानों को कोई सुविधा नहीं देता है। वह शाम को सात बजे आ गए थे, बताया कि कल रात 10 बजे के आसपास ट्रॉली तुल पाएगी।
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अलीगंज के पास सराय निवासी अलीब ने बताया कि वह छह वर्षों से चीनी मिल में ट्रैक्टर ट्रॉली से गन्ना लेकर आ रहे हैं। किसानों के लिए न तो विश्रामगृह है। ऐसे में जाड़े में रात जागकर, ट्रॉली के नीचे लेटकर और गर्मी में गन्ने के ऊपर बैठकर समय व्यतीत करना पड़ता है।
मोतीपुर से बैलगाड़ी में गन्ना लाए लल्लूराम ने बताया कि वह 20 साल से गन्ना ढो रहे हैं। यार्ड का कूड़ा बटोरकर, पताई साथ लाकर उसे जलाकर रात गुजारते हैं।
खम्हौल के नूरुद्दीन का कहना है कि गन्ना किसानों का मिल प्रबंधन निरंतर शोषण कर रहा है। यार्ड के पास न तो पानी की बेहतर व्यवस्था है, न ही शौच जाने का कोई साधन है, जिससे भोर के पहर उन्हें खुले में दूर जंगल के पास जाकर शौच करना पड़ता है। तब तक किसानों को गन्ने, बैलों की चोरी का भय रहता है।
नरसिंहपुर के श्रीपाल सिंह ने बताया कि वह 25 वर्षों से ट्रैक्टर, ट्रॉली में गन्ना ला रहे हैं। कई वर्ष पहले किसानों को तापने के लिए खोई दी जाती थी, वह भी बंद कर दी गई है। यार्ड में धूल और गर्द इतनी है कि मिल के कर्मचारी, मास्क लगाए रहते हैं, जबकि गन्ना किसान खुले आसमान के नीचे दिन और रात व्यतीत कर रहा है।

बोले अमीरनगर के किसान
रात में ठंडक से बचने के लिए गन्ने की पत्ती साथ लेकर आए
अमीरनगर। कुंभी चीनी मिल गेट पर किसानों के लिए बनाए गए किसान विश्राम गृह में साफ सफाई न होने के कारण किसान रात में अपने वाहनों के नीचे सोते मिले। किसानों का कहना है ट्रॉलियों में गन्ना लाने वालों का गन्ना पहले तौला जाता है। जिस वजह से उन्हें काफी समय लग जाता है। रात में ठंडक से बचने के लिए गन्ने की पत्ती लेकर आए हैं।

पवन कुमार निवासी नंदलालपुर कहते हैं भले ही किसानों के लिए किसान विश्रामगृह बने हो लेकिन सोने के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। खुले आसमान के नीचे या फिर गन्ना वाहनों के नीचे सोना पड़ता है।

पंकज पाल नंदलालपुर निवासी का कहना है कि यार्ड में किसानों के लिए भले ही शौचालय बनाए गए हो लेकिन बंद पड़े हैं। जो सुविधाएं होनी चाहिए वह एक भी नहीं हैं।

सुरेंद्र कुमार जायसवाल का कहना है कि यहां गन्ना लेकर आने में सुविधाएं कम दिक्कत अधिक हैं एक तो डनलप से गन्ना लाने बाले किसानों की कोई यहां सुनने वाला नहीं है। यार्ड में इतनी गर्द उड़ती है की यहां बैठ कर खाना तक नहीं खाया जा सकता है।

गन्ना क्रय केंद्रों पर यह सुविधाएं होनी चाहिए
गन्ना क्रय केंद्र पर किसानों के बैठने के लिए पंडाल और पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए, बैलगाड़ी के पशुओं के पानी पीने के लिए नाद की व्यवस्था होनी चाहिए, ठंडक से बचाव के लिए अलाव की व्यवस्था होनी चाहिए, किसानों को शिकायत या सुझाव के लिए प्रत्येक केंद्र पर अधिकारियों ने मोबाइल नंबर लिखा बोर्ड लगाया जाना अनिवार्य है।

गन्ना किसानों के लिए यार्ड के पास ही शौचालय बने हैं, पानी पीने की पर्याप्त व्यवस्था है, गर्मियों में वाटर कूलर और घड़ों का पानी किसानों के लिए उपलब्ध रहता है। अभी मौसम गर्म है। पाला और कोहरा गिरने पर आग जलवाई जाती है।
-ओमपाल सिंह यूनिट हेड / उपाध्यक्ष, बजाज हिंदुस्थान शुगर लि गोला

किसानों के रात्रि विश्राम के लिए दो विश्रामगृह, पानी पीने के लिए पानी की टंकी, शौच के लिए शौचालय बने हुए हैं। यदि इनमें कोई कमी है तो इनको शीघ्र ही सही कराया जाएगा ताकि किसानों को कोई दिक्कत न आए।
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- आरएस ढाका, गन्ना महा प्रबंधक कुंभी चीनी मिल
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